पवई झील की प्रॉमिनेड का पुनर्विकास: बीएमसी का बड़ा कदम पर्यटन संवर्द्धन के लिए
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मुंबई के पूरब परिसर में स्थित पवई झील के मनोरम क्षेत्र का बड़े पैमाने पर पुनर्विकास करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र को अधिक आकर्षक पर्यटन स्थल बनाना तथा नई सुविधाएं और राजस्व सृजन के साधन स्थापित करना है।
यह पुनर्विकास कार्य मुख्यतः पवई झील के दक्षिणी किनारे पर स्थित आदि शंकराचार्य मार्ग के आसपास केंद्रित होगा। बीएमसी ने इस योजना के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए लगभग 1.75 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है।
पवई झील स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के बीच समय से लोकप्रिय स्थल रहा है, विशेषकर मानसून के दौरान जब झील पूरी तरह से भर जाती है। यह क्षेत्र सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, जहां गणेशोत्सव के दौरान पारंपरिक गाट पर विसर्जन क्रियाकलाप होते हैं।
झील के दक्षिणी किनारे लगभग 1.75 किलोमीटर लंबी प्रॉमिनेड है, जो गणेश घाट और पवारवाडी विसर्जन स्थल को जोड़ती है। यह प्रॉमिनेड 2008 में विकसित हुई थी, लेकिन पिछले 18 वर्षों में इसका सौंदर्यीकरण या मरम्मत कार्य पर्याप्त नहीं हुआ।
मेट्रो स्टेशनों से जुड़ी सीढ़ियां, एस्केलेटर और भूमिगत नालियों के निर्माण जैसे अवसंरचनात्मक कार्यों के कारण प्रॉमिनेड की स्थिति और बिगड़ी है। ये नालियां सीवेज को झील में प्रवेश करने से रोकने के लिए बनाई जा रही हैं।
स्थानीय निवासियों, पर्यावरण समूहों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद बीएमसी ने इस क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास शुरू करने का निर्णय लिया है, जो वर्तमान अवसंरचना कार्य पूर्ण होने के पश्चात किया जाएगा।
परियोजना के तहत, जुड़ी हुई नगर पालिका की जमीनों के विकास और पर्यटक-केन्द्रित सुविधाओं के निर्माण की सम्भाव्यता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाओं में कुछ आकर्षणों के लिए टिकट प्रणाली, खाद्य कोर्ट और अन्य सहूलियतें शामिल हैं, जिनसे परियोजना आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने।
यह प्रस्ताव जुलाई 2025 में आयोजित पवई झील पुनरुद्धार समीक्षा बैठक में उत्पन्न हुआ, जहाँ अधिकारियों ने विस्तृत विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।
223 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली पवई झील की जलधारा 6.61 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ विभिन्न मछलियाँ, मगरमच्छ तथा मौसमी प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं, जो जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
अधिकारियों का मानना है कि बेहतर अवसंरचना, सौंदर्यीकरण और प्रयाप्त पर्यटक सुविधाएं झील के आकर्षण को बढ़ा सकती हैं, साथ ही मुंबई के इस प्रमुख प्राकृतिक स्थल में इको-टूरिज्म और मनोरंजन को विकसित करने में सहायक होंगी।