महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (म.न.स.) के नेता यशवंत किलेदार ने मुंबई में मानसून के आधिकारिक आगमन से पहले जलभराव की स्थिति को लेकर महानगरपालिका बीएमसी की कार्यप्रणाली की निंदा की है। उन्होंने यह विवादास्पद मामला बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया।
किलेदार ने कहा कि बीएमसी के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने पहले ही बाढ़ के खतरे की चेतावनी दे चuke थे, लेकिन प्रशासनिक अफसरों द्वारा किए गए निरीक्षण और नदीनालों की सफाई के दावों के बावजूद शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ है। यह स्थिति बीएमसी की तैयारियों की कमी को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “मानसून शुरू होने से पहले ही मुंबई में जलभराव की समस्या सामने आ गई है।” इस प्रकार के जलभराव ने लोगों की आवाजाही और जीवन में बाधा उत्पन्न की है, जो स्पष्ट करता है कि प्रशासन पर्याप्त सतर्क एवं सक्रिय नहीं था।
म.न.स. नेता ने मुंबई की मेयर रितु तावड़े और भाजपा विधायक अमीत साटम को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर तथा विधायक की ओर से मानसून से पहले नालियों की सफाई और कूड़े के निस्तारण संबंधी दी गई उम्मीदें धरातल पर पूरी नहीं हुई हैं।
यशवंत किलेदार ने मेयर से निवेदन किया कि वे दिखावे से अधिक जनहित और नागरिक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि मुंबई की मानसूनी तैयारियों को लेकर जनता में निरंतर चिंता बढ़ रही है।
संदर्भ: मुंबई में पिछले वर्षों में भी मानसून के दौरान जलभराव एवं बाढ़ की समस्याएं नियमित रूप से सामने आती रही हैं, जो बीएमसी की तरफ से पूर्वानुमान और समय पर कार्यवाही की आवश्यकता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
इस घटना ने पुनः यह मुद्दा उठाया है कि शहर की अवसंरचना और साफ-सफाई उपायों को मजबूत बनाने के लिए निरंतर और प्रभावी प्रयास आवश्यक हैं, ताकि मुंबईवासियों को मानसून में सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन और जीवनयापन मिल सके।