नालों से भारी मात्रा में कूड़ा-कर्बरा मिलने से बढ़ी जलजमाव की चिंता
मुंबई में मानसून से पहले बीएमसी ने नालों की सफाई अभियान तेज कर दिया है। लेकिन साकिनाका क्षेत्र में हाल ही में किये गए डी-सिल्टिंग प्रोजेक्ट के दौरान कर्मचारियों को नाले में भारी मात्रा में ऑटो रिक्शा के टुकड़े, फ्रिज, सोफ़ा और लकड़ी के सामान मिलने से कड़ी नाराजगी और चिंता व्यक्त की जा रही है।
शहर के अधिकारियों के अनुसार, यह जंक सामग्री नाले के भीतर जमा हुई थी, जिसने बारिश के पानी के स्वाभाविक प्रवाह को बाधित कर दिया था। यह सफाई काम मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ रोकने के उद्देश्य से किया जा रहा था।
यह घटना मुंबई में कूड़ा नाले या नालों में फेंके जाने की समस्या को फिर से उजागर करती है। अधिकारियों ने बताया कि फ्लोटिंग कूड़ा और निर्माण सामग्री के टुकड़े सालाना डी-सिल्टिंग के बावजूद नालों में जमा होते रहते हैं, जिससे जल निकासी अवरुद्ध होती है।
नालों में कूड़ा डालने के चलते बारिश के पानी की निकासी क्षमता कम हो जाती है, जो भारी बारिश के दौरान नीचले इलाकों में बाढ़ का कारण बनती है।
शहर के आयुक्त अश्विनी भिड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नालों के आस-पास उच्च सुरक्षा बाड़ लगाकर और कूड़ा डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई करके इस समस्या का समाधान किया जाए। साथ ही, बीएमसी मानसून के शुरू होने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखे हुए है।
संदर्भ: हाल ही में मुंबई में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय उद्यान करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।