मुंबई उपनगर रेलवे की मानसूनी तैयारी: सुरक्षित और निर्बाध सेवाओं का वादा
मुंबई में आने वाले मानसून के दौरान सुरक्षित और बिना अवरोध के ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने के लिए Western Railway (WR) ने अपने उपनगरीय नेटवर्क में व्यापक मानसूनी तैयारी की है। यह पहल भारी बारिश के बीच सेवा में व्यवधान को कम करने तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। पिछले दो वर्षों में WR की तैयारी ने मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में कहीं भी लंबे समय तक जलभराव या बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी और किसी भी प्रमुख सेवा बाधा को सफलतापूर्वक रोका। WR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के अनुसार, आगामी मानसून के लिए मिशन मोड में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं जिनमें नालों, नालियों और पुल-मार्गों की सफाई और रेत हटाना, रेलवे ट्रैक के किनारे कचरा हटाना, नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, अतिरिक्त पानी निकासी पंपों की स्थापना और पेड़ छंटाई शामिल हैं। WR ने मानसून संचालन के लिए एक समग्र कार्य योजना तैयार की है, जिसमें निवारक उपाय, आकस्मिक योजना और प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेप शामिल हैं ताकि सेवा में व्यवधान न्यूनतम हो और रेलवे बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।मुख्य पहलें:
- व्यापक ड्रेनेज कार्यः 58 पुलों और नालों की सफाई की पहचान की गई, जिनमें से 90% कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 किलोमीटर नालियों की सफाई चल रही है, जिसमें अब तक 50 किलोमीटर से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। कमजोर स्थलों पर नए नाले और मैनहोल भी बनाए गए हैं।
- बाढ़ नियंत्रण उपाय: 126 उच्च क्षमता वाले पानी निकासी पंप स्थापित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10% अधिक हैं। अतिरिक्त पंप इमरजेंसी के लिए रखे गए हैं।
- बाढ़ मापक और वर्षा संवेदी उपकरण: वास्तविक समय में निगरानी के लिए 40 बाढ़ गेज और 6 स्वचालित डिजिटल वर्षा गेज लगाए गए हैं।
- उन्नत जल स्तर निगरानी: SCADA आधारित जल स्तर निगरानी उपकरणों को मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में संवेदनशील पुलों पर लगाकर सतत निगरानी और समय पर चेतावनी सुनिश्चित की जा रही है।
- कीचड़ साफ-सफाई अभियान: पिछले मानसून से अब तक लगभग 480 मक्क विशेष ट्रेनों के माध्यम से कीचड़, कचरा और मिट्टी हटाने का कार्य किया गया है। इसके लिए Muck Special वैगनों, JCB, Poclain मशीनों और मजदूरों का प्रयोग किया गया है।
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग: ड्रोन और फ्लोटर कैमरा ड्रोन की सहायता से नालों और पुलों की सफाई की निगरानी की जा रही है। गहरे सफाई के लिए विशेष सक्शन और डी-स्लजिंग मशीनें भी इस्तेमाल की जा रही हैं।
- माइक्रो-टनलिंग और अतिरिक्त जल निकासी मार्ग: 1200 मिमी और 1800 मिमी व्यास वाली पाइपों से माइक्रो-टनलिंग कार्य किए जा रहे हैं। चर्चगेट-वीरार सेक्शन में 19 स्थानों पर माइक्रो-टनल पाइप उद्घाटन बढ़ाए गए हैं, जिससे जल निकासी क्षमता में सुधार हुआ है।
- रेल पटरियों की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों का प्रबंधन: कमजोर और बाढ़ प्रवण स्थलों की पहचान कर ट्रैक उठाना और अतिरिक्त ड्रेनेज व्यवस्था की गई है। पानी निकासी पंपों की संख्या 10% बढ़ाई गई है।
- पेड़ प्रबंधन: ट्रैक के पास पेड़ों की छंटाई और हटाने का कार्य किया गया है ताकि तेज़ हवा और बारिश के दौरान ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
- संयुक्त निरीक्षण और समन्वय: बीएमसी, एमबीएमसी और वीवीसीएमसी के साथ संयुक्त निरीक्षण किए गए हैं। पोवाई झील, विहार झील, तुलसी झील और पेल्हर बांध के सुरक्षा ढांचे का भी निरीक्षण कर सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
- गश्ती और मानसून भंडारण: सभी संवेदनशील स्थलों पर गश्ती हेतु पुरुष, ब्रिज गार्ड और सुरक्षा कर्मचारी तैनात किए गए हैं। विरार क्वारी में जरूरत के अनुसार मलबा, कंकड़ धूल और अन्य आपातकालीन सामग्री जमा की गई है।

