बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को गहरा झटका लगा है। 8 अक्टूबर 2026 को उनके निधन के बाद पुणे स्थित फार्महाउस पर देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। आमतौर पर हिंदू रीति-रिवाजों में सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि परिवार ने रात में अंतिम विदाई देने का फैसला क्यों लिया। अब उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी वजह बताई है।
मल्हार पाटेकर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उस समय परिवार गोवा में था और पिता के पार्थिव शरीर को पुणे के पास स्थित उनके फार्महाउस तक पहुंचाना था। परिवार को उम्मीद थी कि वे जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन सफर में अनुमान से ज्यादा समय लग गया।
उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर का निधन सुबह हुआ था। जब तक परिवार फार्महाउस पहुंचा, तब तक काफी समय बीत चुका था। ऐसे में पार्थिव शरीर को और देर तक रखना उचित नहीं लगा। इसी वजह से परिवार ने उसी दिन देर रात अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे जिले के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया। इस दौरान उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। परिवार के सदस्यों के अलावा उनके प्रशंसक और फिल्म जगत से जुड़े लोग भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
पिता को खोने के दुख के बीच मल्हार ने उनके सामाजिक कामों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर हमेशा इंसानियत के लिए मिलकर काम करने और समाज की भलाई करने की सीख देते थे।
नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे। किसानों और ग्रामीण इलाकों की मदद के लिए उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी। उनके जाने के बाद परिवार उनकी इसी सोच और समाजसेवा की विरासत को आगे बढ़ाना चाहता है।
नाना पाटेकर भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन फिल्मों में उनके यादगार किरदार और समाज के लिए किए गए काम लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

