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नवजोत कौर सिद्धू ने रंधावा का नोटिस बताया बेबुनियाद, दी कानूनी कार्रवाई की सख्त चेतावनी

कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस पर नवजोत कौर सिद्धू ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह झूठा और निराधार करार दिया है। क्रिकेटर-राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपने जवाब में साफ कहा कि वह अपने हर बयान पर दृढ़ता से कायम हैं और किसी भी तरह की सफाई या बयान वापसी का सवाल नहीं उठता।

डॉ. सिद्धू ने नोटिस को तथ्यहीन बताते हुए चेतावनी दी—“नोटिस तुरंत वापस लो, वरना मैं भी कानूनी कार्रवाई करूंगी।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों व तथ्यों पर आधारित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी नेता द्वारा सवाल उठाना या मुद्दों पर चर्चा करना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और उसे मानहानि बताना गलत है। दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच नोटिसों की यह लड़ाई अब कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में नई हलचल लेकर आई है।

पार्टी में प्रभावशाली माने जाने वाले सिद्धू और रंधावा के बीच बढ़ते इस विवाद पर अब सभी की नजर है कि क्या रंधावा अपना नोटिस वापस लेते हैं या मामला और आगे बढ़ता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}