एनसीईआरटी ने ‘नृत्यांगना’ प्रतिमा की मूल छवि पुनर्स्थापित करने का निर्णय लिया
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सोमवार को कक्षा 9 की कला की नई पाठ्यपुस्तक में प्रतिष्ठित “नृत्यांगना” मूर्ति की मूल तस्वीर पुनः शामिल करने की घोषणा की। यह निर्णय ऐसे विवाद के बाद आया, जिसमें मूर्ति के ऊपरी हिस्से को ढकने का विकल्प हटाने की मांग उठी थी।
पहले प्रकाशित तस्वीर में कांस्य की बनीं यह युवती या लड़की बिना कपड़ों के ऊपरी शरीर के साथ प्रदर्शित की गई थी। लेकिन अपडेटेड संस्करण में मूर्ति के सीने के भाग को काला रंग लगाकर ढका गया था, जिससे उसकी शारीरिक रूपरेखा छिप गई थी।
यह मूर्ति सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजो-दड़ो शहर में लगभग 2300 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व के बीच बनाए जाने का अनुमान है। मूर्ति में लड़की गहनों से सज्जित है और उसका बाल बन बाँधा हुआ है। आज यह राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में संरक्षित है।
यह विवाद पहले भी उठा था, जब कुछ परिषद सदस्यों ने इसे सार्वजनिक तौर पर नग्न प्रस्तुति माना और इस पर आपत्ति जताई। हालांकि, केंद्र सरकार के एक विशेषज्ञ ने इन आपत्तियों का विरोध किया था।
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने बताया कि जैसे ही पाठ्यपुस्तक में इस छवि से संबंधित विवाद उत्पन्न हुआ, विभाग को मामले की जांच के निर्देश दिए गए। विशेषज्ञों से परामर्श के बाद मूर्ति की मूल तस्वीर को पुनः शैक्षिक सामग्री में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय से पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों की सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित होगी। साथ ही, यह पुरातात्विक धरोहर के महत्व को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।