एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी) तैयार किया गया है, जिसमें रियल-टाइम मौसम डेटा, हवाई यातायात की स्थिति, और ग्राउंड ऑपरेशंस को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया गया है। इससे सेकंडों में ऑपरेशनल फैसले लिए जा सकेंगे, रनवे का अधिकतम उपयोग होगा, और गेट आवंटन व फ्लाइट सीक्वेंसिंग पहले से अधिक तेज और सटीक हो जाएगी। 36 घंटे पहले पता चलेगा कोहरा
दिल्ली एयरपोर्ट ने पुणे स्थित आईआईटीएम के विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (वाईफाईएक्स) मॉडल को अपने सिस्टम से जोड़ा है, जिसकी 85 फीसदी सटीकता बताई गई है। यह मॉडल 36 घंटे पहले घने कोहरे का अलर्ट दे देता है, जिससे एयरलाइंस, एटीसी, और ग्राउंड स्टाफ पहले से तैयारी कर लेते हैं और उड़ान संचालन बाधित नहीं होता। जीरो विजिबिलिटी में भी लैंडिंग
डायल के अनुसार आईजीआई के तीनों मुख्य रनवे 11L/29R, 11R/29L और 10/28 अब दोनों सिरों से कैट–III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से सुसज्जित हैं। द्वारका साइड पर रनवे 10/28 के अपग्रेड के बाद जीरो विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग संभव है। वहीं, अब प्रति घंटे 30 लैंडिंग हो सकेंगी। जहां पहले घना कोहरा छंटने के बाद सामान्य संचालन शुरू करने में 6 घंटे लगते थे, लेकिन अब यह समय घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा।

