सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, ड्रोन सर्वे से जुटाए गए डेटा का उपयोग हादसों की आशंका वाले ब्लैक स्पॉट की पहचान के लिए भी किया जाएगा। कई बार छोटे-छोटे तकनीकी दोष समय के साथ बड़े हादसों का कारण बन जाते हैं। एरियल सर्वे के जरिये ऐसे स्थानों को पहले ही चिन्हित कर वहां चेतावनी संकेत, बैरियर या डिजाइन में सुधार जैसे कदम उठाए जा सकेंगे। इससे सड़क सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी। एनएचएआई ने इस परियोजना के लिए 36 महीनों की अवधि तय की है। इस दौरान स्वतंत्र इंजीनियर न सिर्फ संचालन और देखरेख के कार्यों की निगरानी करेगा, बल्कि गुणवत्ता या अन्य विवादों की स्थिति में मध्यस्थ की भूमिका भी निभाएगा। तीन हिस्सों बांटकर हुआ है निर्माण कार्य…
छह लेन का यह एक्सेस कंट्रोल लिंक की अनुमानित लागत करीब पांच हजार करोड़ है। पूरा लिंक तीन खंडों में तैयार किया जा रहा है। जिसमें दो खंडों का काम पूरा हो चुका है। 26 किमी के फरीदाबाद से सेक्टर-65 तक केएमपी पर वाहन चल रहे हैं। वहीं, जैतपुर से फरीदाबाद के सेक्टर-65 तक के 24 किमी हिस्से का काम पूरा भी हो गया है। डीएनडी से जैतपुर के बीच 12 किमी के हिस्से में से नौ किमी के एलिवेटेड हिस्से पर काम चल रहा है।

