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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा – एक ही पिलर पर बनेगा फ्लाईओवर, उसके ऊपर दूसरा फ्लाईओवर और सबसे ऊपर दौड़ेगी मेट्रो – नितिन गडकरी कानपुर दौरा

Report By : ICN Network

कानपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बोले- “हम नई तकनीक से हजारों करोड़ रुपये बचा रहे हैं।

कानपुर: नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान – फ्लाईओवर के ऊपर फ्लाईओवर, फिर मेट्रो

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कानपुर में नई तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा, “हम ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे फ्लाईओवर के ऊपर एक और फ्लाईओवर बनेगा और उसके ऊपर मेट्रो चलाई जाएगी। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी बल्कि करोड़ों रुपये की बचत भी होगी।

गडकरी ने बताया कि भारत अब मलेशिया से लाई गई नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे मेट्रो के पिलर्स की दूरी 30 मीटर से बढ़ाकर 120 मीटर की जा सकती है। “इससे अब तक 40 हजार करोड़ रुपये बचाए जा चुके हैं,” उन्होंने कहा।
इसके अलावा, गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस तकनीक का सुझाव देने का भी जिक्र किया, जिसके बाद इसे मंजूरी मिली और शहरी विकास विभाग ने इसे लागू किया। उनका कहना था कि यह बदलाव आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट सिस्टम में क्रांतिकारी सुधार लाएगा।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साझा किया अपना अनुभव, छात्रों को दी प्रेरणा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे जीवन में बेहतरीन शिक्षक मिले, लेकिन 1975 में जब मैं मैट्रिक में था, तब इमरजेंसी लागू हो गई। उस दौरान मैंने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया, जिससे मेरी पढ़ाई प्रभावित हुई और मैं इंजीनियरिंग के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया।” उन्होंने बताया कि इस वजह से उनके परिवार और रिश्तेदार नाराज हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

गडकरी ने महात्मा गांधी के विचारों को दोहराते हुए कहा, “हर व्यक्ति जीवनभर एक शिक्षार्थी रहता है। ज्ञान कभी समाप्त नहीं होता।” उन्होंने बृहस्पति महिला महाविद्यालय के वार्षिक कार्यक्रम में छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर दिन कुछ नया सीखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने छात्रों से विज्ञान और नवाचार का उपयोग करके देश को आगे बढ़ाने की अपील की।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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भारत
{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}