दोनों मेट्रो स्टेशन की दिशा में ट्रैवलेटर अलग-अलग और किनारों पर मिलेंगे। इनके बीच अगर कोई यात्री पैदल निकलना चाहता है तो उसके लिए भी जगह छोड़ी जा रही है। ट्रैवलेटर से उतर कर 170 मीटर पैदल चलना होगा। पहले नोएडा प्राधिकरण ने बताया था कि 430 मीटर ट्रैवलेटर लगेंगे परियोजना में 85 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अब विद्युत यांत्रिक और तकनीकी काम शुरू होने पर यह तस्वीर साफ हो गई है। पूरा स्काईवॉक वातानुकूलित रहेगा। बीच में तीन जगहों पर आपातकालीन निकास का विकल्प रखा गया है। यह स्काईवॉक अब तक के बने सभी एफओबी और स्काईवॉक में सबसे ज्यादा हाईटेक होगा।
नोएडा प्राधिकरण ने जून-2023 में काम शुरू होने के दौरान दावा किया था कि स्काईवॉक का निर्माण पांच महीने में पूरा हो जाएगा लेकिन अब तक इसकी सात डेडलाइन टल चूकी हैं। स्काईवॉक में सिविल से जुड़े काम करीब 15 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से होने हैं। विद्युत यांत्रिक विभाग से 15 करोड़ 90 लाख रुपये से होने प्रस्तावित हैं। नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि परियोजना की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही मौके का निरीक्षण भी किया जाएगा।