• Mon. Jun 29th, 2026

UP News: शंकराचार्य के बयान से संविधान नहीं बदलेगा, मंत्री ओपी राजभर का UGC और पंचायत चुनाव पर जवाब

वाराणसी पहुंचे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कई मुद्दों पर खुलकर बयान दिया। यूजीसी नियमों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि किसी को नियमावली में खामी नजर आती है तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत सबके लिए खुली है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के साथ भेदभाव होता है और इस अन्याय के खिलाफ वे संघर्ष जारी रखेंगे।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजभर ने कहा कि सरकार तैयारियों में जुटी है। मतपत्र छपकर जिलों में भेजे जा चुके हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ेगी।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने साफ कहा कि देश संविधान से चलता है और किसी व्यक्ति के बयान से संविधान में बदलाव नहीं हो सकता। गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह विषय कैबिनेट में आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा।

सुहेलदेव जयंती कार्यक्रम में अनिल राजभर द्वारा की गई टिप्पणी पर ओपी राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे पहले अपना इतिहास देखें। उन्होंने दावा किया कि पिछले 23 वर्षों में उन्होंने समाज के लिए जो काम किए हैं, वैसा पहले किसी ने नहीं किया।

सपा के ‘पीडीए’ नारे पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इसका मतलब ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है। वहीं बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और शंकराचार्य से मुलाकात के मुद्दे को उन्होंने राजनीतिक ड्रामा करार दिया। राजभर ने दोहराया कि वे खुलकर अपनी बात रखने वाले नेता हैं और बिना झिझक अपनी राय सामने रखते हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

एग्रीवोल्टिक्स ऊर्जा-लालची AI और दुनिया की भूख मिटा सकता है
भारत
{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}