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UP: सात बार सांसद पंकज चौधरी ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए भरा पर्चा, सीएम योगी रहे प्रस्तावक

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया के तहत केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और सात बार के सांसद पंकज चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके प्रस्तावक बने। नामांकन के मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ ही मंत्री सूर्यप्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, दारा सिंह चौहान, एके शर्मा, कमलेश पासवान और राज्यमंत्री असीम अरुण भी मौजूद रहे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रविवार को लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इससे पहले दोपहर एक बजे पंकज चौधरी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विनोद तावड़े के साथ लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर ANI से बातचीत में पंकज चौधरी ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भाजपा के सभी सांसदों को बुलाया गया है और आगे का फैसला पार्टी करेगी।

पंकज चौधरी कुर्मी (ओबीसी) समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है। 15 नवंबर 1964 को जन्मे पंकज चौधरी गोरखपुर के उद्योगपति स्वर्गीय भगवती चौधरी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उज्ज्वला चौधरी के पुत्र हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में की थी। 1990 में वे भाजपा की जिला कार्यसमिति के सदस्य बने।

वर्ष 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए महराजगंज सीट से पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद 1996 और 1998 में 11वीं व 12वीं लोकसभा में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 1999 में उन्हें सपा प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2004 में वे फिर से संसद पहुंचे। 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी स्वर्गीय हर्षवर्धन से हार मिली, जबकि 2014 से वे लगातार लोकसभा सदस्य बने हुए हैं।

कुर्मी समाज में मजबूत पकड़ और अन्य वर्गों में प्रभाव के चलते पंकज चौधरी को जिले की राजनीति का एक सशक्त चेहरा माना जाता है। सामाजिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति के मामले में उनके विरोधी भी उनकी क्षमता स्वीकार करते हैं। गोरखपुर से अलग होकर महराजगंज जिला बनने के बाद से जिला पंचायत पर भाजपा का दबदबा बना रहा है। उनके भाई प्रदीप चौधरी और मां उज्ज्वला चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के बावजूद उनके भरोसेमंद सहयोगी ही इस पद पर चुने जाते रहे हैं, जो उनकी सफल राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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