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दिल्ली: विशेष व्यायाम और कृत्रिम पैर की मदद से मरीजों को कम समय में दोबारा चलने के लिए तैयार किया जाएगा

सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में पैर गंवाने वाले मरीजों को जल्द आत्मनिर्भर बनाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉक्टरों ने एक खास पुनर्वास कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें आधुनिक तकनीक, विशेष व्यायाम और कृत्रिम पैर की मदद से मरीजों को कम समय में दोबारा चलने के लिए तैयार किया जाएगा।

इस कार्यक्रम की खासियत इमीडिएट पोस्ट ऑपरेटिव प्रोस्थेसिस (आईपीओपी) तकनीक है। इसमें ऑपरेशन के तुरंत बाद ही मरीज को अस्थायी कृत्रिम पैर लगाया जाता है। इससे घाव जल्दी भरने, सूजन कम करने और मरीज को जल्द चलने की ट्रेनिंग देने में मदद मिलती है। साथ ही, पैर खोने के बाद पैदा होने वाले डर और मानसिक तनाव को कम करने में भी यह तकनीक सहायक होती है।एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की ट्रॉमा सर्जरी और क्रिटिकल केयर विभाग की डॉ. निदा मीर ने बताया कि एम्स के इस अध्ययन में मरीजों को दो तरह की एक्सरसाइज कराई जाएंगी। इसमें आधुनिक आइसोकाइनेटिक एक्सरसाइज और पारंपरिक व्यायाम की तुलना की जाएगी

एम्स के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि मरीजों के चलने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए थ्रीडी गेट एनालिसिस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस विशेष लैब में आधुनिक कैमरों की मदद से मरीज की चाल का अध्ययन कर उसमें सुधार किया जाएगा। एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. राजेश सागर ने बताया कि कार्यक्रम में मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है। पैर गंवाने के बाद होने वाले तनाव और अवसाद से बाहर निकालने के लिए मनोचिकित्सकों को भी टीम में शामिल किया गया है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )