तीनों प्राधिकरण में संपत्तियों के आवंटन नियमों में एकरूपता के लिए शासन स्तर से यूनिफाइड पॉलिसी बनाई गई थी। नोएडा प्राधिकरण में यह पॉलिसी 25 फरवरी से प्रभावी है। इसके बाद से पॉलिसी में शामिल कई नियमों की जटिलता सामने आ रही थी। 3 अक्टूबर को हुई बोर्ड बैठक में प्राधिकरण ने यह विषय रखा था। बोर्ड ने निर्देश दिया था कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की संयुक्त समिति बनाकर जिन विंदुओं पर बदलाव किया जाना जरूरी है उनको चिन्हित किया जाए। इसके बाद प्राधिकरण ने होने वाले बदलाव को चिह्नत कर प्रारूप तैयार कर लिया है। इस प्रारूप पर चेयरमैन के हस्ताक्षर होने हैं फिर अगली बोर्ड बैठक में इसकी जानकारी देकर बदलाव प्रभावी किए जाने हैं।
शेयर होल्डिंग में बदलाव की सूचना न देने पर जुर्माना 25 फरवरी से: यूनिफाइड पॉलिसी में यह नियम शामिल किया गया था कि औद्योगिक, वाणिज्यिक, संस्थागत प्लॉट का आवंटन अगर किसी समूह या कंपनी के नाम पर होता है तो उसकी शेयर होल्डिंग में बदलाव की सूचना 90 दिन के अंदर देनी होगी। ऐसा न करने वाले आवंटियों पर प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। लेकिन यह जुर्माना किस दिन से जुड़ेगा तय नहीं था। प्राधिकरण ने यह स्पष्ट करने के लिए 25 फरवरी 2025 की तारीख तय की है। पहले एक महीने का समय शेयर होल्डिंग में बदलाव की सूचना देने के लिए प्राधिकरण आवंटियों को दे चुका है।
छोटे वाणिज्यिक प्लॉट और दुकान आवंटन के नियम सरल होंगे : पॉलिसी में सभी वाणिज्यिक संपत्तियों के आवंटन को नियम एक कर दिए गए हैं। ऐसे में छोटे प्लॉट जो 800 वर्ग मीटर से भी कम हैं और दुकानें उनको लेने के लिए भी आवेदन में आयकर रिटर्न, पूंजी, लेनदेन का ब्यौरा अनिवार्य हो गया है। इस वजह से नए लोग जो अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं उनके लिए समस्या आ रही है। इसको देखते हुए प्राधिकरण ने छोटे प्लॉट और दुकानों के आवंटन में यह बाध्यता हटाने का निर्णय लिया है। इससे आवंटन के नियम सरल होंगे। वाणिज्यिक प्लॉट में बड़े आवंटन में निर्माण अनुभव से सड़क, पुल निर्माण के अनुभव को हटाया जाएगा। प्राधिकरण अधिकारियों का यह तर्क है कि आवंटी ने अगर पूर्व में कोई इमारत बनाई है तो उसका आकलन निर्माण अनुभव में किया जा सकता है। लेकिन सड़क और पुल जैसे निर्माण अनुभव का आकलन इमारत के संदर्भ में प्रतिवर्ग फुट में किया जाना मुमकिन नहीं है।

