ठाणे मेट्रो परियोजना के तहत 3,000 पेड़ों की कटाई पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश का चिंता व्यक्त
सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अभय ओका ने ठाणे इनर सर्कुलर मेट्रो परियोजना के तहत लगभग 3,000 पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरणीय संरक्षण के लिए दृढ़ता से हस्तक्षेप करें और बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई के खिलाफ आवाज उठाएं।
रविवार को जोशी-बेदेकर कॉलेज, ठाणे में ‘‘पर्यावरण संरक्षण और संरक्षण – एक भूला हुआ मौलिक कर्तव्य’’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में ओका ने क्षेत्र के पर्यावरणीय संकट पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मेट्रो प्रोजेक्ट के बारे में सार्वजनिक नोटिस छोटे और अस्पष्ट प्रारूप में प्रकाशित किए जाते हैं, जिससे आम जनता को प्रभावित पेड़ों की सही जानकारी नहीं मिल पाती। इस कारण नागरिकों द्वारा आपत्तियां दर्ज करवाना कठिन हो जाता है। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय हिस्सा लें और अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं।
ओका ने ठाणे की झीलों के आसपास हो रही अनियंत्रित कंक्रीटकरण की भी निंदा की, जिसे उन्होंने चिंताजनक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विकास कार्य और बढ़ती नदी प्रदूषण वैज्ञानिक सोच की कमी को दर्शाते हैं, जो पर्यावरणीय योजना में बाधक हैं।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हैं, किंतु कानून के पालन को अपनी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा नहीं बना पाए हैं। उनका कहना था, ‘‘जब तक कानून का पालन सांस्कृतिक मूल्य नहीं बन जाता, तब तक कानूनों की प्रभावशीलता नगण्य रहेगी।’’
उन्होंने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत स्थित येरुड़ वन क्षेत्र में हाल के वर्षों में पर्यावरणीय क्षरण की बात की। ओका ने यह भी चिंता जताई कि पर्यावरण कार्यकर्ताओं को अक्सर उनकी मेहनत और प्रयासों के बावजूद नजरअंदाज किया जाता है, जो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कर रहे हैं।