तेज पड़ रही ठंड लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। ठंड बढ़ते ही ब्रेन स्ट्रोक (पक्षाघात) के मरीजों की संख्या में चिंताजनक इजाफा हुआ है। ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या लगभग चार गुणा तक बढ़ गई है। बीआरडी मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में रोजाना ब्रेन स्ट्रोक के 12-13 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि नवंबर-दिसंबर में यह संख्या दो-तीन थी
कई मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए। न्यूरो सर्जन डा. अनिंद्य गुप्ता का कहना है कि करीब 60 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं। समय पर अस्पताल पहुंचाने से जान बच सकती है, लेकिन गांवों में जागरूकता की कमी के कारण लोग देर कर देते हैं। उच्च रक्तचाप की नियमित जांच न कराना और ठंड में सावधानी न बरतना इसकी बड़ी वजह है।
न्यूरो सर्जन के अनुसार इनमें से लगभग 60 प्रतिशत लोगों को यह तक पता नहीं था कि वे उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) या मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं। कई मामलों में लोग सुबह ठंडे पानी से नहाकर घर या पूजा घर में बैठे और कुछ ही देर में बेहोश हो गए। जब स्वजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ है।
जांच में उनका रक्तचाप 200-110 मिलीमीटर मरकरी तक पहुंचा हुआ मिला और रक्त में शर्करा का स्तर 300 एमजी के आसपास था, जो सामान्य से बहुत ज्यादा है। ठंड के मौसम में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्तचाप अचानक बढ़ जाता है।