सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के विशेष चुनावीय पुनरीक्षण की वैधता को स्वीकृति दी
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा चुनावी मतदाता सूची के विशेष विस्तारू संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की वैधता को मान्यता दी है। न्यायालय ने कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक उद्देश्य को समर्थित करती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को इस निर्देश के तहत संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, तथापि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल या हटाने के लिए आयोग द्वारा जांच-पड़ताल का मतलब यह नहीं है कि आयोग उस व्यक्ति की नागरिकता पर फैसला कर सकता है।
न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि बिहार में संदिग्ध नागरिकता के आधार पर हटाए गए व्यक्तियों के नाम एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को सौंपे जाएं, ताकि उनकी नागरिकता की समीक्षा एवं निर्णय लिया जा सके।
असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता बिल पारित किया
असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) बिल पारित करने का निर्णय लिया है जिसमें एकल विवाह प्रणाली को बढ़ावा देते हुए बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और सहवास संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा।
हालांकि विपक्ष ने इस विधेयक को समीक्षा के लिए चयन समिति को भेजने की मांग की थी, पर यह बिल पारित कर दिया गया है। इससे असम स्वतंत्र भारत के बाद उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा राज्य बनेगा जिसने समान नागरिक संहिता को लागू किया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि इस कोड का पालन राज्य की आदिवासी आबादी पर लागू नहीं किया जाएगा।
ये दोनों घटनाक्रम देश में चुनावी सुधारों और सामाजिक कानूनों के क्षेत्र में संवैधानिक एवं सामाजिक बदलावों के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो कानून व्यवस्था और जनहित को समुचित रूप से संबोधित करते हैं।