इस परियोजना में रेवेन्यू शेयर मॉडल अपनाया जाएगा। चयनित होने वाली एजेंसी को भविष्य में होने वाली कुल आय का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा रेलवे को देना होगा। रेलवे को इस मॉडल से लंबे समय तक स्थिर और सुनिश्चित आय प्राप्त होगी। इस आय का उपयोग रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने और नई परियोजनाओं में निवेश के लिए किया जाएगा। यह परियोजना रेल मंत्रालय की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में रेलवे की जमीन को व्यावसायिक रूप से विकसित कर राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित राशि 155 करोड़ रुपये
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 155 करोड़ रुपये तय की गई है। यह भूमि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिल्ली को एक नया संगठित कमर्शियल स्पेस भी मिलेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट का रखा जाएगा विशेष ध्यान
परियोजना को मंजूरी देते समय ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा। सब्जी मंडी क्षेत्र पहले से ही भारी ट्रैफिक जाम, संकरी सड़कों और भीड़भाड़ की समस्या से जूझ रहा है। प्रोजेक्ट के शुरू होने से यहां वाहनों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे ट्रैफिक की समस्या और गंभीर हो जाएगी। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि पुनर्विकास के दौरान पार्किंग, प्रवेश और निकास मार्ग तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की उचित योजना बनाई जाएगी, ताकि क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव न पड़े। हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
अधिकारियों की मानें तो प्रोजेक्ट के पूरा होने से लेकर उसके संचालन तक हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों, इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ को काम मिलेगा, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद सुरक्षा, रखरखाव, कार्यालय और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

