नई दिल्ली: प्रस्तावित राष्ट्रीय बीज विधेयक-2025 को लेकर किसानों और विभिन्न संगठनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस पर लोकसभा में जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसानों के पारंपरिक बीजों पर लागू नहीं होगा और उनके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह बिल किसानों, किसान संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया है। उन्होंने बताया कि किसानों को अपने खेत में तैयार किए गए बीजों को उगाने, बोने, बचाने, आपस में बांटने और बेचने का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि विधेयक में बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध बीजों के अनिवार्य पंजीकरण, बीज उत्पादकों और विक्रेताओं के पंजीकरण तथा पौध नर्सरियों के पंजीकरण जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, ताकि बीजों की गुणवत्ता और मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा आपात स्थिति में बीजों की कीमतों को नियंत्रित करने, बीजों के प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी को लेबल पर दर्शाने और उन्हें SATHI पोर्टल पर दर्ज करने का प्रावधान भी विधेयक में रखा गया है। फिलहाल यह मसौदा पूर्व-विधायी परामर्श के चरण में है और इस पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।