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ग्रेटर नोएडा: जहाज के मास्टर पर धोखाधड़ी के आरोप, नियम के उल्लंघन से कंपनी को हुआ नुकसान

शिपिंग कंपनी के जहाज को रेड शी (लाल सागर) में रोकने का मामला सामने आया है। कंपनी ने जहाज के मास्टर पर इसे रोकने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। कोर्ट के आदेश पर अब सेक्टर-142 कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। नोएडा सेक्टर-137 निवासी और एंबर शिपिंग आईएनसी कंपनी के अधिकृत एजेंट देव आशीष दुबे ने अपने ही कंपनी के तेल टैंकर जहाज एमटी वलरस (पूर्व नाम कर्डेलिया मून) के मास्टर पुनीत नायर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
कंपनी प्रतिनिधि का कहना है कि कंपनी के भारत स्थित अधिकृत एजेंट हैं। कंपनी के पास एमटी वलरस सहित कुल 10 जहाज हैं। इन जहाजों के प्रबंधन के लिए कंपनी ने मार्गाओ मरीन सॉल्यूशंस (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की सेवाएं ली थीं।
वर्ष 2025 में पुनीत नायर की मुलाकात नोएडा सेक्टर-137 में देव आशीष दुबे से हुई थी। नायर ने स्वयं को पूर्व में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर मास्टर (कैप्टन) के रूप में कार्यरत बताया था। उन्होंने कहा था कि जहाज के चालक दल की नियुक्ति प्रबंधन कंपनी मार्गाओ मरीन सॉल्यूशंस द्वारा की जाती है। इस कारण उन्हें एमटी वलरस का मास्टर नियुक्त कर दिया गया। आरोप है कि 13 अक्तूबर-2025 को पुनीत नायर ने गुजरात के वडीनार पोर्ट पर जहाज का कार्यभार संभाला था। जहां जहाज तेल कार्गो उतार रहा था। जहाज को 31 अक्तूबर-2025 तक पोर्ट सईद (मिस्र) पहुंचना था। मगर जहाज का नियंत्रण मिलते ही मास्टर पुनीत नायर और प्रबंधन कंपनी के कुछ प्रतिनिधियों ने एंबर शिपिंग पर अनुचित वित्तीय मांगें थोपनी शुरू कर दीं। मांगें पूरी न होने पर जहाज को अनैतिक तरीके से हाईजैक करने और संचालन रोकने की धमकी दी गई। जब कंपनी ने दबाव में आने से इनकार किया, तो जहाज को पोर्ट साईद ले जाने के बजाय रेड सी की ओर मोड़ दिया गया। इस दौरान दूसरे पक्षों को बताया गया कि जहाज प्रबंधन से निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहा है। मगर मास्टर द्वारा जानबूझकर आदेशों का पालन न करने के कारण जहाज समय पर ब्लैक सी के लोडिंग पोर्ट पर नहीं पहुंचा। वहीं कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मिश्र का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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