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सोनीपत रियल एस्टेट में निवेश क्यों करें? विशेषज्ञ की नज़र से समझिए

रियल एस्टेट विशेषज्ञ प्रणव शर्मा बताते हैं कि वर्ष 2025 में सोनीपत ने स्पष्ट रूप से “अभी निवेश करें” वाले चरण में प्रवेश कर लिया है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, औद्योगिक विस्तार और NCR में लगातार बढ़ती मांग ने इसे एक अनुमानित निवेश क्षेत्र से बदलकर तेजी से उभरता, विकास-प्रधान और क्रियान्वयन आधारित बाजार बना दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जहां संपत्ति की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, वहीं हरियाणा के सोनीपत और करनाल जैसे शहर निवेशकों के लिए नए ‘गोल्ड माइन’ साबित हो रहे हैं। दिल्ली–पानीपत–करनाल RRTS जैसी अहम परियोजनाओं की मंजूरी ने इन क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। दिल्ली के बेहद करीब होने और औद्योगिक व शैक्षणिक विस्तार के चलते सोनीपत अब सिर्फ सैटेलाइट शहर नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, उद्योग और आवास का प्रमुख केंद्र बन गया है।

ताज़ा हाउसिंग डेटा के अनुसार सोनीपत में संपत्ति की कीमतों में 52.27% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है और औसत मूल्य ₹5,745 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है। इस तेजी के पीछे IMT खारखौदा में MSIL (Maruti Suzuki) के विशाल प्लांट और अगस्त 2025 में शुरू हुए UER-II कनेक्टिविटी लिंक जैसे बड़े प्रोजेक्ट अहम भूमिका निभा रहे हैं। गुरुग्राम और नोएडा की तुलना में जो किफ़ायत का अंतर था, वह भी अब तेजी से कम हो रहा है। दिल्ली मेट्रो रेड लाइन एक्सटेंशन और दिल्ली–पानीपत RRTS के 2028 के बाद संचालन में आने की संभावना है, इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 12–18 महीने निवेशकों के लिए अंतिम उपयुक्त अवसर हैं, ताकि कीमतों में आगामी उछाल से पहले निवेश का फायदा उठाया जा सके।

सोनीपत की मजबूत निवेश क्षमता के पीछे तीन बड़े कारण हैं—औद्योगिक विस्तार, विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और उत्कृष्ट रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट। IMT खारखौदा अब पूरी तरह जमीन पर उतर चुका है और MSIL का प्लांट 25 फरवरी 2025 से उत्पादन शुरू कर चुका है। प्लांट में 11,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में आवास और वाणिज्यिक संपत्तियों की मांग में तेज उछाल आया है। यह मांग कल्पना आधारित नहीं, बल्कि रोजगार-आधारित है, जिस वजह से सोनीपत देश के सबसे सुरक्षित उभरते रियल एस्टेट क्षेत्रों में से एक बन चुका है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भी सोनीपत अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है। UER-II के शुरू होने से एयरपोर्ट तक यात्रा का समय लगभग 40% कम हो जाएगा। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) का निर्माण तेज़ी से जारी है और 2025 के अंत तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। दिल्ली मेट्रो रेड लाइन एक्सटेंशन को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि दिल्ली–पानीपत RRTS का काम अक्टूबर 2025 में शुरू होगा और 2030 तक तैयार हो जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सोनीपत की कनेक्टिविटी NCR के किसी भी प्रमुख शहर के बराबर या उससे बेहतर हो जाएगी।

सोनीपत मास्टर प्लान 2031 भी इसके भविष्य को मजबूत बनाता है। ₹20,220 करोड़ से अधिक की लागत वाला यह प्लान 2.5 मिलियन आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिसमें भूमिगत बिजली, स्मार्ट जल आपूर्ति, आधुनिक ट्रांसपोर्ट और 30% हरित क्षेत्र जैसे सस्टेनेबल मानकों को शामिल किया गया है। LEED-प्रमाणित कमर्शियल बिल्डिंग, वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रण जैसे उपाय इसे उत्तर भारत का मॉडल सिटी बना रहे हैं।

औद्योगिक और आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सोनीपत में शैक्षणिक संस्थानों का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, अशोका यूनिवर्सिटी और SRM यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों ने इसे नॉलेज हब में बदल दिया है, जिससे रेंटल प्रॉपर्टी की मांग हमेशा स्थिर बनी रहती है। नरेला–AIIMS–शैक्षणिक कॉरिडोर भी इस क्षेत्र की आकर्षण शक्ति को और बढ़ाता है।

कनेक्टिविटी, उद्योग और शिक्षा के इस मिश्रण का सीधा असर संपत्ति की कीमतों और किराया बाजार पर भी दिख रहा है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच औसत कीमत ₹5,745 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुकी है, जबकि कुंडली क्षेत्र में 32.7% की भारी वृद्धि दर्ज हुई है। इसके बावजूद सोनीपत गुरुग्राम और नोएडा की तुलना में अभी भी 30–50% सस्ता है, जिससे निवेशकों के लिए यह बेहद आकर्षक विकल्प बनता है। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में 8–12% तक और कमर्शियल में 12–18% तक के रेंटल रिटर्न मिल रहे हैं, जो इसे NCR के सबसे अधिक लाभदायक बाजारों में शामिल करते हैं।

प्रतिस्पर्धा की बात करें तो सोनीपत, गुरुग्राम और नोएडा की तुलना में अधिक किफायती, कम भीड़भाड़ वाला और स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है। वहीं सोhna रोड जैसे महंगे क्षेत्रों के मुकाबले, सोनीपत का इंडस्ट्रियल और ट्रांजिट-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल उसे व्यवहारिक और दीर्घकालिक विकल्प बनाता है।

अगर जोखिम की बात करें तो निर्माण देरी और नियामक अनुपालन प्रमुख चुनौतियाँ हैं, लेकिन HRERA-अनुमोदित प्रोजेक्ट्स, विश्वसनीय डेवलपर्स और NH-44, KMP या UER-II के पास के क्षेत्रों का चयन करके इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लगभग ₹25,000 करोड़ की सरकारी परियोजनाएँ लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार 2025–26 सोनीपत रियल एस्टेट में निवेश का सबसे सही समय है। MSIL प्लांट के संचालन और UER-II के शुरू होने के बाद यह बाजार अब अनुमान नहीं, बल्कि पुष्टि आधारित निवेश का उदाहरण बन चुका है। आने वाले वर्षों में मूल्य वृद्धि की मजबूत संभावना, उच्च रेंटल मांग और औद्योगिक-शैक्षणिक विस्तार इसे NCR का अगला बड़ा विकास केंद्र बना रहे हैं।

अंततः कहा जा सकता है कि सोनीपत “अगला गुरुग्राम” बनने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि अपने दम पर NCR का नया विकास केंद्र बनकर उभर रहा है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे आने वाले वर्षों का सबसे सुरक्षित और लाभदायक निवेश गंतव्य बता रहे हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)