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नौतपा और बढ़ती गर्मी में अयोध्या के रामलला के लिए विशेष भोग और कपड़ों व ठंडे फूलों का इंतजाम

Report By : Rishabh Singh, ICN Network

अयोध्या में अधिकतम तापमान 41°C पहुंच गया है। नौतपा मौसम की बेरुखी से अयोध्या में बालक राम की सेवा में बदलाव किया गया है। उन्हें बेहतरीन हल्की कढ़ाई किए हुए सूती वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। हल्के आभूषण से श्रृंगार किया जा रहा है। पुजारी ने बताया कि प्रभु को रोज दही या लस्सी के साथ मौसमी रसीले फलों का भोग लगाया जा रहा है। इनमें आम, मौसमी, लीची, खरबूज, तरबूज आदि हैं।

रामलला के लिए नया AC आ गया है, जो जल्द गर्भगृह में लगाया जाएगा। अभी गर्भगृह में कूलर लगाया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर को AC सौंप दिया है। चंपत राय का कहना है कि ट्रस्ट भगवान की सेवा लगातार बेहतर कर रहा है। भगवान की हर छोटी से छोटी जरूरत पर ध्यान दिया जा रहा है।

अयोध्या में वैष्णव पीठ श्रीराम वल्लभाकुंज में भगवान को दही की लस्सी के साथ आम, बेल आदि के फलों के रस, नींबू की शिकंजी और आश्रम के बने छाछ का भोग लगाया जा रहा है। भगवान के लिए AC लगाया लगाया है। मंदिर के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास ने बताया कि मौसम के अनुसार भगवान की सेवा बदलती रहती है।

स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान की मूर्ति में प्राण का संचार हो जाता है। इसके बाद भगवान को भी भूख और प्यास लगती है। भगवान अपने भक्तों को समय-समय पर सपने में या संकेत देकर इसका आभास कराते रहते हैं। इसलिए हम सभी भक्त एक छोटे बालक की ही तरह रामलला या भगवान श्रीराम के हर सुख-सुविधा का ध्यान रखते हैं।

ठंडक देने वाले गुलाब, चमेली, गेंदा आदि के फूलों से श्रृंगार किया जा रहा है। रामलला को बेहद प्रिय तुलसी के साथ उनके एक हजार नाम से रोज अर्चन चल रहा है। रामलला इन दिनों जो कपड़े पहन रहे हैं, वह दिल्ली के फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी खुद डिजाइन कर भेज रहे हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}
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