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UP-बहराइच में SSB ने लगाया मेडिकल कैंप,नि:शुल्क दवा के साथ ग्रामीणों को भीषण ठण्ड में संक्रमण से बचने के दिए टिप्स

यूपी के बहराइच जिले में एसएसबी के द्वारा मेडिकल कैंप का आयोजन कर ग्रामीणों का इलाज किया गया और उन्हें निशुल्क दवा भी वितरित की गई।बहराइच में चेतना अभियान के तहत 59वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नानपारा द्वारा ग्राम कौवाबाड़ी गांव में मानव चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसे कैलाश चन्द रमोला कमान्डेंट 59वीं वाहिनी के तत्वाधान में आयोजित किया गया।

आयोजन शिविर में डॉ आकिब एजाज़ (जीडीएमओ) द्वारा 22 ग्रामीणों का चिकित्सीय जांच की गई और चिकित्सीय टीम के द्वारा निशुल्क दवाई वितरण का भी वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉ आकिब एजाज़ (जीडीएमओ) ने ग्रामीणों को ठंड के मौसम में फैल रही विभिन्य संक्रमण बीमारियों के बारे में जानकारी देने के साथ उन्हें जागरूक भी किया गया तथा ग्रामीणों को साफ सुथरा रहने के लिए प्रेरित किया गया,इस अवसर पर निरीक्षक सुग्रीव प्रसाद प्रसाद व ग्राम प्रधान सहित अन्य बल-कार्मिक उपस्थित रहे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}