चाइल्ड पीजीआई में 100 स्टेम सेल कलेक्शन के माध्यम से 92 बच्चों का सफल इलाज हुआ। खास बात यह है कि इनमें से 61 मामलों में बच्चों से ही स्टेम सेल लिए गए, यानी बीमारी से पीड़ित बच्चों के भाई-बहन के स्टेम सेल का उपयोग इलाज में किया गया। शेष मामलों में माता-पिता के स्टेम सेल का प्रयोग हुआ। अधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि संस्थान के लिए गर्व की बात है और इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन मिला है।
अस्पताल के निदेशक प्रो एके सिंह ने बताया कि एकत्रित स्टेम सेल का उपयोग बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए किया गया। इन स्टेम सेल्स से ल्यूकेमिया, थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और न्यूरोब्लास्टोमा जैसी जानलेवा बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज हुआ। उन्होंने बताया कि ये बीमारियां बाल हेमेटोलॉजी और ऑन्कोलॉजी के सबसे जटिल मामलों में शामिल हैं, जिनमें सफल ट्रांसप्लांट के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टेम सेल कलेक्शन की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संस्थान बच्चों में भी इस जटिल प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से करने में सक्षम है। खास बात यह है कि सभी 100 प्रक्रियाएं बिना किसी परेशानी के पूरी हुईं, जो अस्पताल की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और अनुभवी मेडिकल टीम को दर्शाती हैं। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ सीमा दुआ कर रही हैं। उनके साथ डॉ सत्यम अरोड़ा, डॉ अनुपा पोखरेल, नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियनों की टीम ने अहम भूमिका निभाई। वहीं, डॉ. नीता राधाकृष्णन और डॉ. अनुज सिंह की टीम बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट का सफल संचालन कर रहे हैं।
क्या है स्टेम सेल
स्टेम सेल (मूल कोशिकाएं) वो खास कोशिकाएं होती हैं, जिनमें खुद को दोहराने और शरीर की किसी भी दूसरी कोशिका (जैसे रक्त, हड्डी, त्वचा, या तंत्रिका कोशिका) में बदलने की क्षमता होती है, जो शरीर की मरम्मत और विकास के लिए एक प्राकृतिक ‘रिपेयर सिस्टम’ की तरह काम करती हैं, और चोट लगने या बीमारी के कारण खराब हुई कोशिकाओं की जगह ले सकती हैं।

