मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (ANC) ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 29 वर्षीय सूरज प्रजापति को PIT-NDPS एक्ट 1988 के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन में भेज दिया है। यह कार्रवाई उन मामलों में की जाती है, जहां आरोपी बार-बार अपराध करने की प्रवृत्ति दिखाता है और उसकी वजह से सार्वजनिक सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है। आदेश के मुताबिक सूरज को एक साल के लिए कोल्हापुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध किया गया है। जानकारी के अनुसार, सूरज प्रजापति गोरेगांव के शंकर नगर स्थित ववासरी हिल्स में रहता है और पिछले दो वर्षों से नशीली दवाओं की तस्करी में लगातार सक्रिय था। उसके खिलाफ मुंबई के कई थानों में NDPS एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कुल सात मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हर बार जमानत पर रिहा होने के बाद वह फिर से अपना नेटवर्क खड़ा कर ड्रग्स की तस्करी में लग जाता था।
लगातार अपराध दोहराने और नेटवर्क के विस्तार के कारण मुंबई पुलिस ने उसके खिलाफ कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया। वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट और संयुक्त पुलिस आयुक्त की अनुशंसा के बाद PIT-NDPS एक्ट के तहत उसकी नजरबंदी को मंजूरी मिली और गृह विभाग के आदेश जारी होते ही उसे कोल्हापुर जेल भेज दिया गया। ANC की टीम ने डीसीपी नवनाथ ढवले के मार्गदर्शन में कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई की अगुवाई कर रहे सीनियर पीआई शशिकांत जगदाले ने बताया कि सूरज के ड्रग नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है, और उसके संपर्क में जुड़े अन्य तस्करों को पकड़ने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि मुंबई को ड्रग्स से मुक्त करने के लिए इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयाँ जरूरी हैं और भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा।
PIT-NDPS एक्ट 1988 एक विशेष कानून है, जिसका उपयोग उन आदतन ड्रग तस्करों के खिलाफ किया जाता है जो बार-बार अपराध करने के बाद भी सुधरते नहीं हैं और जिनकी गतिविधियाँ सार्वजनिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं। विभिन्न रिपोर्टों और वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश के आधार पर सरकार ऐसे अपराधियों को एक निर्धारित अवधि के लिए जेल में बंद रखने का आदेश जारी करती है, ताकि अपराध पर रोक लगाई जा सके और शहर में शांति बनी रहे।