वहीं, शहर के मॉल, मार्केट, सोसाइटियों में भी सजावट का दौर जारी है। चर्च में यहां ऊंट, भेड़, हिरण, परियां, सेंटा क्लॉज के अलावा पेड़-पौधे, तारे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं शहर में मॉल, मार्केट, सेक्टर-सोसाइटियों में लाइटिंग से सजे क्रिसमस ट्री भी लोगों को लुभा रहे हैं। क्रिसमस में दो दिन हैं। यीशु के आगमन की खुशी में चर्चों से लेकर मसीही घरों तक रौनक है। समुदाय के अनुयायी प्रभु के आगमन कार्यक्रम को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। फादर एंड्रयू कोरिया ने बताया कि क्रिसमस की तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। चर्च प्रांगण में कारीगर प्रभु के जन्म स्थान गोशाला की चरनी एवं चर्च परिसर की सजावट को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। बालरूप में यीशु और स्टार फ्रेम के साथ सेल्फी पॉइंट बना है। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर की शाम में चर्च में क्रिसमस भजन और पूजन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 25 दिसंबर को प्रभु के जन्मोत्सव के अवसर पर समस्त अनुयायी चर्च में एकत्रित होकर पूजा और प्रार्थना कर पापों से मुक्ति और अमन-शांति की कामना करेंगे। उन्होंने बताया था कि प्रभु यीशु मसीह ईश्वर होने के बावजूद एक साधारण से गोशाला की चरनी में जन्म लिए थे। इसलिए चर्चों में विभिन्न अद्भुत चरनी की झांकियां सजाई जाती हैं
नोएडा: प्रभु यीशु के जीवन से जुड़ीं झांकियां तैयार की जा रहीं
वहीं, शहर के मॉल, मार्केट, सोसाइटियों में भी सजावट का दौर जारी है। चर्च में यहां ऊंट, भेड़, हिरण, परियां, सेंटा क्लॉज के अलावा पेड़-पौधे, तारे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं शहर में मॉल, मार्केट, सेक्टर-सोसाइटियों में लाइटिंग से सजे क्रिसमस ट्री भी लोगों को लुभा रहे हैं। क्रिसमस में दो दिन हैं। यीशु के आगमन की खुशी में चर्चों से लेकर मसीही घरों तक रौनक है। समुदाय के अनुयायी प्रभु के आगमन कार्यक्रम को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। फादर एंड्रयू कोरिया ने बताया कि क्रिसमस की तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। चर्च प्रांगण में कारीगर प्रभु के जन्म स्थान गोशाला की चरनी एवं चर्च परिसर की सजावट को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। बालरूप में यीशु और स्टार फ्रेम के साथ सेल्फी पॉइंट बना है। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर की शाम में चर्च में क्रिसमस भजन और पूजन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 25 दिसंबर को प्रभु के जन्मोत्सव के अवसर पर समस्त अनुयायी चर्च में एकत्रित होकर पूजा और प्रार्थना कर पापों से मुक्ति और अमन-शांति की कामना करेंगे। उन्होंने बताया था कि प्रभु यीशु मसीह ईश्वर होने के बावजूद एक साधारण से गोशाला की चरनी में जन्म लिए थे। इसलिए चर्चों में विभिन्न अद्भुत चरनी की झांकियां सजाई जाती हैं

