पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड की हत्या ने राजनीतिक हलकों में मचाई हलचल
नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान की अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हत्या की खबरों ने राजनीतिक और सुरक्षा जगत में गंभीर प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस घटना को आतंकवाद के खिलाफ एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा है।
घटना पीओके के मुजफ्फराबाद में हुई, जहां हमजा बुरहान को कई गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। बुरहान को 2022 में भारत सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया था और उसे अल बदर के सहयोगी सदस्य के रूप में पहचाना गया था, जो एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है।
तारिक अनवर ने कहा, “आतंकवाद का पूर्ण अंत होना चाहिए। पाकिस्तान में आतंकियों की मौत से हमें उम्मीद है कि यह क्षेत्र आतंकवाद से मुक्त होगा। यह अच्छी खबर है कि आतंकी पनाहगाहों पर कोई सहनशीलता नहीं होगी।”
उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणियों का भी समर्थन किया। तारिक ने कहा, “राहुल गांधी ने देशहित में सच्चाई को उजागर किया है। गद्दारी वही है जो देश की भलाई के खिलाफ काम करता है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेश यात्राओं और नागरिकों से विदेश यात्रा न करने की अपील के बीच द्वंद्व को भी उजागर किया है, जिसे कई लोगों द्वारा आलोचना का विषय माना गया है।
साथ ही, तारिक अनवर ने बेरोजगारी एवं महंगाई जैसे मुद्दों पर युवाओं के असंतोष को दर्शाने वाले वायरल सोशल मीडिया समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विषय में पूछे गए प्रश्नों का भी जवाब देते हुए कहा कि यह देश में सरकारी नीतियों के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी है। उन्होंने इसे वर्तमान सरकार की गलत नीतियों से उत्पन्न बिगड़े माहौल का संकेत माना।
इसके अतिरिक्त, कांग्रेस सांसद ने पश्चिम बंगाल सरकार के निर्णय का समर्थन किया, जो बीएसएफ को सीमा सुरक्षा के लिए जमीन सौंप रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, बंगाल की तरफ से लगभग 27 किलोमीटर ज़मीन बीएसएफ को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सौंप दी गई है, जिससे सीमाओं की सुरक्षा और कड़ी होगी।
यह पहल विशेष रूप से पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ बिना बाड़ वाली सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है और यह क्षेत्रीय स्थिरता हेतु एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समग्र रूप से, हमजा बुरहान की हत्या और मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम ने देश में आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक संवाद के मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है।