सदियों पुरानी पेंशन व्यवस्था में आया व्यापक सुधार, डिजिटल तकनीक से हुआ प्रक्रिया का कायापलट
नई दिल्ली। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि पिछले एक दशक में भारत की पेंशन व्यवस्था में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। इस बदलाव ने पेंशन प्रक्रिया को पारंपरिक और जटिल ढांचे से निकालकर एक तकनीकी और नागरिक-केंद्रित प्रणाली में परिवर्तित कर दिया है, जो पारदर्शिता और सुविधा पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत के मंच से डॉ. सिंह ने यह विश्वास व्यक्त किया कि पेंशन प्राप्तकर्ता केवल लाभार्थी नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के अनुभवी स्तंभ हैं। उनका योगदान, अनुभव और समझ भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेंशन प्रणाली को अधिक सरल, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार की निरंतर कोशिशों को रेखांकित किया। जिससे पेंशनभोगी नागरिकों की गरिमा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होती है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कोर्ट में 37 मंत्रालयों और विभागों से जुड़े कुल 985 लंबित मामलों पर चर्चा की गई थी। ये मामले 15 अप्रैल 2026 तक 45 दिनों से अधिक समय से लंबित थे। इनमें से अबतक लगभग 74 प्रतिशत, यानी 728 मामलों का समाधान हो चुका है।
विशेष रूप से 16 मंत्रालयों और विभागों से जुड़े 26 प्रमुख मामलों को मंत्री के सामने रखा गया, जिनमें रक्षा, गृह एवं रेलवे मंत्रालय प्रमुख हैं। पेंशन अदालत में आठ लाभार्थी एवं पारिवारिक पेंशनधारी सीधे उपस्थित रहे और 18 अन्य देश के विभिन्न हिस्सों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े, जिससे इसकी राष्ट्रीय पहुंच का प्रमाण मिला।
इस कार्यवाही के तहत एक मामले में पेंशन राशि के रूप में 74 लाख रुपए से अधिक जारी किए गए, जबकि दो अन्य मामलों में लगभग 46-46 लाख रुपए का भुगतान हुआ।
डॉ. सिंह ने 2014 के बाद से पेंशन सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि पहले पेंशन विभाग सीमित संसाधनों में संचालित होता था, आज डिजिटलकरण और नागरिक-केंद्रित नीतियों ने इसे एक उत्तरदायी विभाग में बदल दिया है। जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन समेत कई डिजिटल नवाचार लागू किए गए हैं, जिससे पेंशनभोगियों को सुविधा मिली है।
इसके अलावा, परिवार पेंशन नियमों को सरल बनाया गया है, लापता व्यक्तियों के संबंध में पुराने नियम समाप्त किए गए हैं, तलाकशुदा बेटियों के लिए प्रक्रियाएं आसान हुई हैं, तथा दिव्यांग आश्रितों के लिए भी राहत प्रदान की गई है।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाएं ताकि नागरिकों को शीघ्र और संतोषजनक सेवा मिल सके, न कि वे केवल प्रक्रियाओं में उलझें।
उन्होंने पेंशन अदालतों की भूमिका को सराहा, जो लंबित और जटिल शिकायतों के समाधान में प्रभावी साबित हुई हैं। 2017 से अब तक कुल 15 पेंशन अदालतें आयोजित की गई हैं, जिनमें 27,812 मामलों पर विचार हुआ, तथा 71.72 प्रतिशत से अधिक मामले सफलतापूर्वक निपटाए गए।
शेष मामलों का समाधान मंत्रालयों के बीच समन्वय एवं समीक्षा प्रक्रिया के तहत किया जाता रहा है, जिससे पेंशन व्यवस्था में प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।