इंडिगो की फ्लाइट्स रद होने से बुधवार को हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। यह परेशानी गुरुवार सुबह तक भी ऐसी बनी रही। इस परेशानी के चलते हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने स्पष्ट किया है कि इंडिगो की दर्जनों उड़ानों के रद होने का कारण दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लागू हुई नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल, FDTL) नियम नहीं हैं। बाकी सभी एयरलाइंस (एयर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा एयर आदि) ने पहले से ही पायलटों की पर्याप्त व्यवस्था कर रखी है, इसलिए उन्हें कोई खास दिक्कत नहीं आई।
फेडरेशन ने सीधे-सीधे इंडिगो के प्रबंधन पर अंगुली उठाई है। उनका कहना है कि असल समस्या इंडिगो की लंबे समय से चली आ रही लीन मैनपावर पॉलिसी यानी जानबूझकर बहुत कम स्टाफ रखने की नीति है।
फेडरेशन ने तंज कसते हुए कहा कि इंडिगो प्रबंधन को पुअर पायलट्स फर्स्ट नहीं, बल्कि पीपल फर्स्ट की नीति अपनानी चाहिए।
बताया गया कि ऑनटाइम परफार्मेंस के मामले में देश की तमाम एयरलाइंस में इंडिगो की स्थिति सर्वाधिक बदतर है। उड़ान नियामक संस्था डीजीसीए के अनुसार, इंडिगो का ऑनटाइन परफार्मेंस 19.7 प्रतिशत है। यह आंकड़ा तीन दिसंबर के लिए जारी किया गया है। ऑनटाइम परफार्मेंस के मामले में अभी देश की सबसे अच्छी एयरलाइंस एयर इंडिया एक्सप्रेस है। इसकी परफार्मेंस रेट 69.9 प्रतिशत है।
फिलहाल इंडिगो का कहना है कि अभी केवल इतना ही कहा जा सकता है कि स्थिति को सुधरने में कम से कम 48 घंटे का समय लगेगा। दिल्ली एयरपोर्ट की बात करें तो कम से कम तीन दर्जन उड़ानों को रद किया गया है। इंडिगो की अधिकांश उड़ानें घंटों की देरी से रवाना हो रही हैं। दिल्ली एयरपोर्ट से संचालित होने वाली दो तिहाई उड़ानें विलंब की चपेट में हैं। औसत विलंबित उड़ानों के विलंब की दर करीब आधा घंटा है।