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उत्तराखंड: पारंपरिक हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

केंद्रीय महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल उत्तराखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान देगी। यह अभियान गांवों को सशक्त करेगा और बुनकरों व कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह पहल ई-कॉमर्स से उत्पादों को जोड़ेगी और कौशल विकास पर जोर देगी। इससे राज्य में लखपति दीदी योजना को भी नई गति मिलेगी, जिससे महिला स्वयं सहायता समूहों को लाभ होगा।

वोकल फार लोकल अभियान को उत्तराखंड में गति देने के लिए केंद्र की महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। यह पहल न केवल राज्य की पारंपरिक कला को जीवित रखेगी, बल्कि गांवों को सशक्त भी बनाएगी।

केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत उत्तराखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी। साथ ही हस्तशिल्पियों, बुनकरों व कारीगरों को बाजार उपलब्ध हो सकेगा।

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल में ग्रामीण कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोडऩे को एकीकृत ढांचा विकसित होगा।

इसके साथ ही ग्रामीण उत्पादों को ई-कामर्स प्लेटफार्म से जोडऩे के साथ ही खादी और स्थानीय हस्तशिल्प को आधुनिक ब्रांड के रूप में स्थापित की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए हस्तशिल्पियों को नवीनतम तकनीक व डिजाइन मुहैया कराने के साथ ही उनके कौशल विकास में वृद्धि की जाएगी।

लखपति दीदी योजना को मिलेगी उड़ान

राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए संचालित लखपति दीदी योजना को अब नई उड़ान मिलेगी। राज्य में अभी तक 1.63 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यानी उन्हें सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है।

अब केंद्र की स्वयं सहायता समूहों को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से जोड़ने की योजना से राज्य में लखपति दीदी योजना को संबल मिलेगा।

यहां भी योजना के तहत स्वयं सहायता उद्यमिता मास्टर बनाए जाएंगे, जो क्लस्टर स्तरीय फेडरेशन के तहत सामुदायिक खुदरा आउटलेट होंगे। राज्य में अभी तक 68 हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )