8 जुलाई को डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि जून में दोनों देशों के बीच तय शांति समझौता समाप्त हो चुका है। इसके बाद उन्होंने ईरान पर कड़े सैन्य हमले और आर्थिक प्रतिबंधों को पुनः लागू कर दिया है।
ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के खिलाफ विरोधी कार्रवाईयों की एक श्रृंखला शुरू कर दी है, जिसमें घनीभूत हवाई हमले और तेल शोधन के लिए अहम खार्ग द्वीप को कब्जे में लेने की धमकी शामिल है। ये कदम ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने के लिए दबाव बनाने की कोशिश हैं।
हालांकि व्हाइट हाउस के अंदर उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं कि इससे ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचा जा सकेगा। यह रणनीति पहले भी अपनाई गई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम हासिल नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रम्प के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
संघर्ष की शुरुआत ट्रम्प और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की योजना के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करने और उसके सरकार को अस्थिर करने के प्रयास के तौर पर हुई थी। लेकिन अब इस युद्ध का केंद्र बिंदु बदल चुका है, और परमाणु मुद्दे तुलना में कम प्रमुख रह गए हैं।
यह स्थिति आगामी वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व की राजनीतिक अस्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ट्रम्प प्रशासन के इस तेवर ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाला है।