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यूएई के राष्ट्रपति चंद घंटों के लिए दिल्ली आए

यूएई और ईरान में भारत के राजदूत रहे केसी सिंह ने द ट्रिब्यून में लिखा है कि इस यात्रा की पूर्व सूचना न होना इशारा करता है कि गल्फ़ और पश्चिम एशिया में तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण चीज़ें सामान्य नहीं हैं.

यूएई के राष्ट्रपति जब दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुँचे तो उनकी अगवानी में भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद खड़े थे. पीएम मोदी ऐसी गर्मजोशी दुनिया के कम ही नेताओं के लिए दिखाते हैं.

पिछले महीने यूएई के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का भी दौरा किया था. यूएई के राष्ट्रपति भले नई दिल्ली कुछ घंटों के लिए ही आए लेकिन एक साथ कई समझौते हुए. इनमें से सबसे ज़्यादा चर्चा स्ट्रैटिजिक डिफेंस पार्टनरशिप के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर दोनों देशों के हस्ताक्षर की हो रही है.

दोनों देशों में रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर सहमति तब बनी है, जब सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पिछले साल सितंबर में एक डिफेंस पैक्ट हुआ था.

पाकिस्तान-सऊदी का डिफेंस पैक्ट

यह डिफेंस पैक्ट कहता है कि सऊदी और पाकिस्तान में से किसी एक के ख़िलाफ़ “किसी भी तरह की आक्रामकता” को दोनों के ख़िलाफ़ हमला माना जाएगा. यह नेटो के अनुच्छेद-5 जैसा है, जिसका सदस्य तुर्की भी है और जिसकी सेना अमेरिका के बाद सबसे बड़ी है.

यूएई और भारत के बीच द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी को लेकर मध्य-पूर्व की न्यूज़ विश्लेषण वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई तुर्की ब्यूरो चीफ़ रेइप सोयलु ने एक्स पर लिखा है, ”ऐसा प्रतीत होता है कि यूएई, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के रक्षा समझौते का संतुलन बनाने के लिए, परमाणु शक्ति संपन्न भारत के साथ साझेदारी कर रहा है.’

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )