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UP- लखीमपुर खीरी में नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण का हुआ समापन, सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने महिलाओं को वितरित किये सर्टिफिकेट

यूपी के लखीमपुर खीरी में तृतीय वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के सीमा चौकी बेलापरसुआ के 40 बेरोजगार महिलाओं को रोजगार सृजन के अवसर के तहत महिन्द्रा स्किल ट्रेनिंग एवं डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा आज ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण समाप्त होने के उपरांत उनको सर्टिफिकेट भी दिया। और उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की गई।

सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने महिलाओं को सर्टिफिकेट वितरण किया। थारू समाज की महिलाओं व बालिकाओं को प्रमाण पत्र भी सौंप गए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान बेला परसुआ लक्ष्मी देवी प्रधानाचार्य बिंदु मिश्रा जगदीश प्रसाद सहित अन्य तमाम लोग मौजूद रहे। ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण के अतिरिक्त ग्रामीणों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नशा मुक्त भारत अभियान साइबर क्राइम स्वच्छ भारत मिशन अभियान के बारे में भी जागरूक किया गया। समापन के मौके पर सब के द्वितीय कमान अधिकारी एमडी तमाड़,समवाय प्रभारी बेलापरसुआ सहित एसएसबी के जवान मौके पर मौजूद रहे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}