Report : ICN NETWORK
(UP) :प्रतापगढ़ जिला कारागार से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ शुक्रवार दोपहर एक विचाराधीन बंदी ने आग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस गंभीर सुरक्षा चूक को देखते हुए कारागार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीआईजी जेल की संस्तुति पर एक उप-कारापाल (डिप्टी जेलर) और दो हेड वार्डर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त विवरण के अनुसार, उन्नाव जिले के माखी थाना क्षेत्र के पुरवा मिर्जापुर रसूलाबाद निवासी दीपक उर्फ राहुल (पुत्र शांति प्रसाद) जिला कारागार प्रतापगढ़ में निरुद्ध था। शुक्रवार दोपहर करीब 12:02 बजे जेल परिसर के भीतर ही संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से उसकी मृत्यु हो गई। मृतक बंदी दीपक 1 नवंबर 2025 से जेल में बंद था। उस पर कंधई थाने में पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धाराओं (मु.अ.सं. 49/24) के तहत मामला दर्ज था।इन अधिकारियों पर गिरी गाज
जेल के भीतर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए निम्नलिखित कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है:- श्री ध्रुव नारायण श्रीवास्तव (उप-कारापाल/डिप्टी जेलर)
- श्री चोन्हर कुमार (हेड जेल वार्डर)
- श्री अखिलेश सिंह (हेड जेल वार्डर)
उच्च स्तरीय जांच शुरू
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक (कारागार) श्री प्रदीप गुप्ता को विस्तृत जांच सौंपी गई है। डीआईजी स्वयं मामले की पड़ताल कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जेल के भीतर बंदी के पास ज्वलनशील पदार्थ कैसे पहुँचा और घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात कर्मी कहाँ थे।अधिकारी का बयान: “जेल प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। दोषी पाए जाने वाले अन्य कर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

