नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा से जुड़े नए VB-G RAM G बिल को पेश किए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया। लोकसभा में भारी हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जबकि विपक्ष ने इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बिल के जरिए महात्मा गांधी का नाम हटाकर एक ऐतिहासिक योजना की पहचान को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने सदन के अंदर और बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी की तस्वीरें हाथ में लेकर गांधी प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च किया। उनका कहना था कि इस तरह के अहम बदलाव बिना व्यापक चर्चा और संसदीय समिति की समीक्षा के नहीं किए जाने चाहिए। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
वहीं सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को और मजबूत करेगा। सरकार के अनुसार, इस बिल के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन तक करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि विपक्ष इसे मनरेगा की मूल भावना से हटने और गांधीवादी विचारधारा को पीछे करने की कोशिश बता रहा है।