मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक मां ने ममता की मिसाल पेश की, लेकिन खुद अपनी जान नहीं बचा सकी। आग की चपेट में आई बस से उसने अपने दोनों बच्चों को तो सुरक्षित बाहर निकाल दिया, मगर खुद बाहर नहीं निकल पाई। हादसे के बाद परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन अब तक पार्वती का शव भी परिवार को नहीं मिल पाया है।
हमीरपुर के राठ क्षेत्र की रहने वाली 42 वर्षीय पार्वती अपने बच्चों प्राची और शनि के साथ नोएडा से पति गोविंद के पास लौट रही थीं। इसी दौरान बस की टक्कर हो गई और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। अफरातफरी के बीच पार्वती ने हिम्मत दिखाते हुए बस का शीशा तोड़ा और दोनों बच्चों को बाहर निकाल दिया।
परिवार के मुताबिक, शीशा टूटने के दौरान कांच का टुकड़ा पार्वती के गले में फंस गया, जिससे वह बस के अंदर ही रह गईं। पार्वती के देवर गुलजारी ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही वे हमीरपुर से मथुरा पहुंचे और लगातार अस्पतालों में तलाश कर रहे हैं। उन्होंने जिला अस्पताल और वृंदावन के अस्पताल में भी खोज की, लेकिन पार्वती का कोई पता नहीं चला। अब परिवार पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काट रहा है।
पुलिस और प्रशासन परिवार को भरोसा दिला रहे हैं, लेकिन बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे ने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी है।