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एमएमआर में फ्लेमिंगो के प्रवासन में देरी से पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ीं

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Apr 19, 2026
Delayed Flamingo Migration Raises Environmental Concerns in MMR

एमएमआर में फ्लेमिंगो प्रवासन में देरी और पर्यावरणीय प्रभाव

इस वर्ष मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में फ्लेमिंगो के प्रवासन में असामान्य देरी देखी गई है, साथ ही संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। सामान्यतः अक्टूबर से नवंबर के बीच प्रवासन होता है, लेकिन इस बार कई महीने विलंब दर्शाया गया है, जिससे पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमियों में चिंता व्याप्त है।

थाणे क्रीक सैंक्चुअरी तथा भांडुप पंपिंग स्टेशन जैसे क्षेत्रों में पिछले सप्ताह के दौरान ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो देखे गए हैं। उच्च ज्वार के समय ये पक्षी नवी मुंबई के उच्चतम उद्यानों की ओर पलायन करते देखे गए, जिनमें टीएस चाणक्य और डीपीएस वेटलैंड्स शामिल हैं, जहाँ उन्हें अभी भी उपयुक्त भोजन उपलब्ध है।

इस प्रवासन में देरी का मुख्य कारण गुजरात में बढ़ी हुई वर्षा अवधि को माना जा रहा है, जहाँ से फ्लेमिंगो आते हैं। जारी बारिश के कारण पक्षी अपनी सामान्य यात्रा समय पर हिमायत नहीं कर पाए और गुजरात में फैल गए। तापमान के बढ़ने पर ही वे धीरे-धीरे मुंबई के तटीय दलदलों की ओर बढ़े। इस बार प्रवासी पक्षियों की संख्या पहले के मुकाबले भारी गिरावट के साथ लगभग 25,000 रह गई, जबकि सामान्यतः यह दो लाख से अधिक होती थी। यह पिछले दशक में सबसे बड़ी कमी और प्रवासन में विलंब का एकमात्र दर्ज मामला है।

नवी मुंबई के दलदल प्रदूषण, भूमि पुन: विनियोग और बाधाओं की चपेट में हैं, जिसके कारण जल निकाय स्थिर और जलीय शैवाल की अधिकता होने लगी है। ऐसे पर्यावरणीय बदलाव फ्लेमिंगो के लिए मिट्टी के दलदलों को पहचानना कठिन बना देते हैं, जो उनके भोजन के लिए आवश्यक हैं। प्रवाशियों के रूट में बदलाव भी देखने को मिला है; फ्लेमिंगो अब मलाड के दलदल क्षेत्रों में भी जाते हुए पाए गए हैं, जो पारंपरिक आवास कम उपयुक्त होने का संकेत है।

हालांकि कुछ सुधार कार्य जैसे चुनिंदा दलदलों की सफाई आरंभ की गई है, परंतु कुल पर्यावरणीय स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो एमएमआर का फ्लेमिंगो आवास के रूप में महत्व खतरे में पड़ सकता है। इसके मद्देनजर स्थायी संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता बढ़ गई है, जिसमें दलदल पुन: स्थापन और प्रदूषण नियंत्रण प्रमुख प्राथमिकताएं हैं, ताकि क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)