नई दिल्ली, भारत – मांसपेशियों की संरचना, ताकत, आकार और सहनशक्ति केवल तभी बनी रहती हैं जब तक उन्हें आवश्यकता होती है। जैसे ही यह मांग खत्म हो जाती है, शरीर की वे प्रक्रियाएं जो पहले मांसपेशियों के विकास के लिए काम करती थीं, अब ऊर्जा संरक्षण के लिए सक्रिय हो जाती हैं। इसका परिणाम धीरे-धीरे मांसपेशियों की क्षमता में गिरावट के रूप में देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति नियमित व्यायाम या प्रशिक्षण बंद कर देता है तो शरीर में मांसपेशियों की पुनर्निर्माण प्रक्रिया कम हो जाती है। इसके बजाय, मांसपेशियों की कोशिकाएँ संक्षिप्त होने लगती हैं, जिससे मांसपेशियों का आकार घटता है और ताकत में कमी आती है। इसे मांसपेशियों के अपघटन की प्रक्रिया कहा जाता है, जो प्राकृतिक और स्वाभाविक है।
डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि व्यायाम से दूर रहने पर शरीर ऊर्जा की बचत पर ध्यान केंद्रित करता है। जब मांसपेशियों की गतिविधि कम होती है, तो शरीर कैलोरी जलाने की दर भी घटाती है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इससे वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है और स्वास्थ्य पर अन्य नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
विशेष रूप से बुजुर्गों और दीर्घकालीन बीमारी से पीड़ित लोगों में मांसपेशियों का क्षय और भी ज्यादा तेज हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्यायाम को पूरी तरह से बंद न करें बल्कि अपने स्तर के अनुसार नियमित हल्की-फुल्की गतिविधि बनाए रखें। इससे मांसपेशियों की ताकत बनी रहती है और स्वास्थ्य सुधरता है।
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा शोध में भी यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि व्यायाम की निरंतरता बनाए रखना मांसपेशियों की स्थिति को बेहतर बनाए रखने का सबसे कारगर तरीका है। मांसपेशियों की गिरावट को रोकने और पुनः सुधारने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंततः, मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम की आवश्यकता होती है। यदि आप व्यायाम बंद करते हैं, तो मांसपेशियों के क्षीण होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो समय के साथ आपकी शारीरिक क्षमता को प्रभावित करती है। इसलिए अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए व्यायाम को रोजमर्रा की आदत बनाएं।