परिवहन विभाग ने व्हाट्सएप चैटबॉट और एआई आधारित प्रणाली के जरिए चालान वसूली में क्रांति लाने की योजना बनाई
राज्य परिवहन विभाग सेवा वितरण में सुधार और कड़ाई से नियम पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डिजिटल उपायों को लागू करने जा रहा है। इस दिशा में दो प्रमुख पहलें शुरू की जा रही हैं: नागरिकों के लिए वाहन से संबंधित सेवाओं हेतु 24×7 व्हाट्सएप चैटबॉट और लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए एआई आधारित कॉलिंग सिस्टम का विस्तार। इन पहलों से जनता की सुविधा बढ़ाने, प्रशासनिक बोझ कम करने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित करने की उम्मीद है।
पहली योजना के तहत एक व्हाट्सएप चैटबॉट लॉन्च किया जाएगा, जो नागरिकों को वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, कर भुगतान, नवीनीकरण और चालान की स्थिति जैसी सेवाओं तक सरल और त्वरित पहुँच प्रदान करेगा। इसके साथ ही आवेदन ट्रैकिंग, प्रक्रिया संबंधी मार्गदर्शन और शिकायत सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के बार-बार आने-जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
वर्तमान में राज्य के 39 जिलों में लगभग 60 आरटीओ कार्यालय भारी भीड़ का सामना कर रहे हैं, जहां अधिकांश सेवाएं शारीरिक रूप से ही प्रदान की जाती हैं। इस कमी को दूर करने के लिए इस लोकप्रिय संवाद मंच का उपयोग किया जाएगा। लगभग ₹2.36 करोड़ की लागत से रोड सेफ्टी फंड की वित्तीय सहायता से इस चैटबॉट को विकसित किया जा रहा है, जिसे प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह चैटबॉट केवल सेवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक सार्वजनिक संवाद के लिए भी विकसित किया जा रहा है। हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाना, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जागरूकता और वास्तविक समय में यातायात की स्थिति जैसे सड़क सुरक्षा संदेश नियमित रूप से साझा किए जाएंगे। दुर्घटना या बाढ़ जैसी आपात स्थिति में भी चेतावनी और मार्गदर्शन इसी प्रणाली के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार इसे न केवल सेवा उपकरण बल्कि सुरक्षा और जागरूकता का माध्य भी बनाया जा रहा है।
राज्य परिवहन आयुक्त राजेश नारveकर ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक वाहन संबंधी सेवाओं को डिजिटल रूप में और आसानी से उपलब्ध कराना है। उनका कहना था, “व्हाट्सएप चैटबॉट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।” इस बयान से सुविधा, पहुंच और डिजिटल शासन पर केंद्रित व्यापक रणनीति स्पष्ट होती है।
साथ ही, ट्रैफिक नियमों के पालन को सख्त करने हेतु एक अन्य पहल के रूप में एआई आधारित कॉलिंग सिस्टम का विस्तार विचाराधीन है। वर्तमान में थाणे आरटीओ में पायलट रूप में चल रहे इस सिस्टम के तहत उल्लंघनों के लिए स्वचालित कॉल की जा रही हैं, ताकि लंबित चालान की वसूली को बढ़ावा दिया जा सके और नियम पालन में वृद्धि हो। यह पहल इसलिए आवश्यक मानी जा रही है क्योंकि मौजूदा स्थिति में चालान वसूली केवल लगभग 40% ही होती है, जबकि कई उल्लंघन बिना समाधान के रह जाते हैं।
पायलट की प्रारंभिक प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है और अब पूरे राज्य में इसके विस्तार पर विचार किया जा रहा है, बशर्ते अनुमोदन और वित्तीय संसाधन उपलब्ध हों। यदि यह व्यापक रूप से लागू हो गया तो चालान वसूली में सुधार होगा और डिजिटल यातायात नियम प्रवर्तन की गंभीरता को भी मजबूत किया जाएगा।