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नो कोशा, नो आलू: कोलकाता का रनघोर बाय सिएना ने सभी नियम तोड़ दिए

Byadmin

Apr 24, 2026 #Dining
No kosha, no aloo: Kolkata’s Rannaghor by Sienna breaks all the rules

कोलकाता के रनघोर का नया अंदाज: पारंपरिक व्यंजन की सीमाओं को चुनौती

कोलकाता का भोजन-संस्कृति हमेशा से ही विविधता और नवाचार का परिचायक रहा है। हाल ही में, स्थानीय रेस्तरां रनघोर ने अपनी नई प्रस्तुति और मेनू के माध्यम से खाने के पारंपरिक नियमों को पूरी तरह से बदल दिया है।

रनघोर, जो कि बंगाली भोजन का प्रतीक माना जाता है, अब बिना कोशा मांस और आलू के व्यंजन प्रस्तुत कर रहा है, जो पेश किए जाने वाले सामान्य व्यंजनों से हटकर है। यह बदलाव न केवल शेफ सिएना की कुकिंग फिलॉसफी को दर्शाता है, बल्कि शहर के खानपान के नक्शे को भी नए स्वरूप में ढाल रहा है।

शेफ सिएना, जिन्हें पारंपरिक बंगाली व्यंजनों में नए प्रयोगों के लिए जाना जाता है, ने इस खास मेनू के जरिए स्थानीय भोजन को स्वच्छ, सरल और पोषक तत्वों से भरपूर बनाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि उन्होंने अनावश्यक सामग्री और अत्यधिक मसालों का प्रयोग कम करके भोजन को अधिक प्रामाणिक और स्वास्थ्यवर्धक बनाने पर जोर दिया है।

कोलकाता की खानपान परंपरा में आलू और कोशा मांस की विशेष जगह रही है। आलू की सादगी और कोशा मांस की समृद्धि मेनू का केंद्र बिंदु होते हैं। लेकिन रनघोर ने इस अवधारणा को चुनौती देते हुए दर्शकों को नए स्वादों और संयोजनों से मिलवाया है।

यह बदलाव न केवल खाने की पसंद को प्रभावित करता है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। खानपान की विविधता को अपनाने और पारंपरिक व्यंजनों को निरंतर विकसित करने की इस पहल की बड़ी सराहना हो रही है।

रनघोर के इस नए प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि कोलकाता की खानपान संस्कृति केवल अतीत तक सीमित नहीं है बल्कि यह निरंतर विकसित हो रही है। भविष्य में इस तरह के नवोन्मेषी कदम और अधिक भोजन प्रेमियों को आकर्षित करने की संभावना रखते हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)