इस्लामाबाद, पाकिस्तान
पिछले सप्ताहांत में इस्लामाबाद में हुए 21 घंटे के मैराथन शांति वार्ता के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया। वार्ता के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर जोर दिया कि वह अपने नाभिकीय ईंधन के संवर्धन के अधिकार को छोड़ दे, लेकिन तेहरान ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, वार्ता में दोनों पक्षों ने कई मुद्दों पर चर्चा की और कुछ प्रगति भी हुई, लेकिन मुख्य विवादास्पद विषय परमाणु ईंधन संवर्धन पर बुनियादी मतभेद बने रहे। अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चलने की मांग की। वहीं, ईरान ने अपने देश के संप्रभु अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता जताई और किसी भी ऐसी शर्त को मानने से इनकार किया जो उसके सैन्य और ऊर्जा विकास को प्रभावित कर सके।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच आशंकाओं के बावजूद वार्ता की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी, क्योंकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए कोई विकल्प भी नहीं दिखता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस प्रक्रिया को ध्यान से देख रहा है और सभी पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की जा रही है।
अमेरिकी विशेष दूत वेंसे ने कहा कि इस दौर की वार्ता में काफी प्रगति हुई है और अब गेंद ईरान के पाले में है, जो निर्धारित करेगा कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि संघर्ष के समाधान के लिए और साहसिक कदम उठाने होंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखी जा सके।
इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, जहां दोनों महाशक्तियों के बीच वार्ता द्वारा तनाव को कम करने की कोशिश जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के नए दौर हो सकते हैं, जो किसी समझौते की दिशा में अग्रसर होंगे।