टेक्सी और रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले पर विवाद
महाराष्ट्र में टैक्सी और रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के प्रस्ताव को शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ड्राइवरों के लिए बाध्यकारी दबाव पैदा कर सकता है और इससे उनके रोज़गार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
निरुपम ने इस नीति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जबकि राज्य भाषा को बढ़ावा देना आवश्यक है, इसे कठोर नियम के रूप में लागू करना उचित नहीं होगा। महाराष्ट्र में कई ड्राइवर विभिन्न भाषायी पृष्ठभूमि से आते हैं, और उनके लिए यह नियम मुश्किलें पैदा कर सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस विषय पर सख्त दंडात्मक रवैया अपनाने के बजाय उन्हें मराठी भाषा सीखने के लिए सहायक वातावरण प्रदान करना चाहिए। उन्हें भाषा प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों का सहारा लेना चाहिए ताकि ड्राइवर सहजता से मराठी सीख सकें।
संजय निरुपम ने अधिकारियों से अपील की है कि वे इस फैसले पर पुनर्विचार करें और एक समान और समावेशी दृष्टिकोण अपनाएं जो ड्राइवरों की आजीविका को प्रभावित न करे। इस तरह की नीति से राज्य में सामाजिक समरसता बनी रहेगी और विविधता का सम्मान होगा।
यह विवाद महाराष्ट्र के परिवहन विभाग के मंत्री प्रताप सारणीक द्वारा लागू किए गए नियम के बाद उभरा है, जिसके तहत राज्य भर में टैक्सी और रिक्शा चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया गया है।