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नोएडा: थाना सेक्टर-24 पुलिस व बदमाशों के मध्य हुई मुठभेड़ में 01 बदमाश घायल

थाना सेक्टर-24 पुलिस द्वारा पिलर नं0-94 के पास चेकिंग की जा रही थी, तभी एनटीपीसी की तरफ से एक ट्रेक्टर पर सवार 02 व्यक्ति आते हुए दिखाई दिए, ट्रेक्टर सवार व्यक्तियों द्वारा पुलिस टीम को चेकिंग करता देख ट्रेक्टर को अचानक से मोड़कर सर्विस रोड़ पर भगाने लगे। संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस टीम द्वारा पीछा कर ट्रेक्टर को रोकने का प्रयास किया गया तो ट्रेक्टर सवार व्यक्तियों द्वारा अपना ट्रेक्टर सेक्टर-54 के जंगल की तरफ छोड़कर भागने का प्रयास करने लगे व अपने आपको पुलिस टीम से घिरता देख बदमाश द्वारा पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से फायर किया गया।

आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया जिसकी पहचान वीरेन्द्र कश्यप उर्फ बिंदु पुत्र गोकरन निवासी ग्राम भदारी, थाना बिशनपुर, पीलीभीत वर्तमान पता त्रिलोकपुरी, दिल्ली, उम्र करीब 34 वर्ष के रूप में हुई है। घायल अभियुक्त के कब्जे से 01 तमंचा मय 01 खोखा कारतूस व 01 जिंदा कारतूस .315 बोर बरामद किया गया है। ट्रेक्टर सवार दूसरे बदमाश को पुलिस टीम द्वारा कॉम्बिंग के दौरान गिरफ्तार किया गया, जिसकी पहचान जसवंत सिंह पुत्र गुलजार सिंह निवासी ग्राम धुलिया, थाना निगोही, शाहजहाँपुर, उम्र करीब 55 वर्ष के रूप में हुई है, जिसके कब्जे से 01 अवैध चाकू बरामद किया गया है। अभियुक्तों के कब्जे से चोरी का एक ट्रेक्टर आयशर कम्पनी रजि0नं0- UP16CL7875 मय ट्रॉली के बरामद किया गया है। घायल अभियुक्त को उपचार हेतु अस्पताल भेजा गया है। अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान ज्ञात हुआ कि अभियुक्त वीरेन्द्र कश्यप उर्फ बिंदु नशे का आदी है व वर्ष 2016 में चोरी के अभियोग में जेल जा चुका था, जेल में रहकर अन्य अपराधियों के सम्पर्क में आकर चोरी के नए-नए तरीके सीखने लगा। अभियुक्त जसवंत सिंह भी नशे का आदी है, व अभियुक्त वीरेन्द्र कश्यप के सम्पर्क में आकर चोरी करने लगा। अभियुक्तों द्वारा नोएडा, दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में घूम फिरकर पार्किंग व सुनसान जगहों पर खड़े वाहनों की रैकी कर लॉक खोल कर चोरी कर ले जाते थे तथा साथ ही बंद पड़े घरो में ताला लगा देखकर रैकी कर घरों से कीमती सामान चोरी कर लेते थे। अभियुक्तों से बरामद ट्रेक्टर के बारे में पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ कि दोनों अभियुक्तों ने मिलकर मोदी मॉल के पीछे से चोरी किया था, जिसे ये बेचने के लिए ले जा रहे थे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}