दिल्ली सरकार ने सरोजिनी नगर आवास परियोजना के लिए 1,091 पेड़ों को हटाने की मंजूरी दी
दिल्ली सरकार ने सरोजिनी नगर में प्रस्तावित आवासीय परियोजना को मंजूरी देते हुए 1,091 पेड़ों के स्थानांतरण और कटाई के लिए रास्ता साफ कर दिया है। यह निर्णय पर्यावरणीय चिंताओं के बीच लिया गया है और इसके चलते स्थानीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
सरोजिनी नगर के नजदीक यह परियोजना दिल्ली की बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है। हालांकि, परियोजना के अंतर्गत इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों को हटाने के कारण पर्यावरणविद और स्थानीय निवासी चिंतित हैं।
यह कदम दिल्ली सरकार और नगर नियोजन प्राधिकरण के मध्य लंबे समय से चली आ रही योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद शहर में आवास की उपलब्धता बढ़ाना और अवैध निर्माणों को नियंत्रित करना है। पेड़ों को काटने के स्थान पर कुछ को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा सके।
स्थानीय वन विभाग ने इस कार्य के लिए पर्यावरणीय सशर्त स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें पर्यावरण सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य बताया गया है। इसके तहत, परियोजना के दौरान हर कटे गए पेड़ का विकल्प के रूप में नई वनस्पति लगाने और हरित क्षेत्र को बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से स्थानीय जैव विविधता पर असर पड़ सकता है, अतः उचित पर्यावरणीय प्रबंधन आवश्यक होगा।सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच सही संतुलन बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सरोजिनी नगर आवास परियोजना दिल्ली के तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवास संकट का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास है, फिर भी इस प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग व्यापक रूप से उठ रही है।