कश्मीर के मुगल परिवार की दो पीढ़ियों में हुई दुखद हानि: आतंकवाद और सेना के ‘मुठभेड़’ में पुत्रों की मौत
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में बीस साल पहले, आतंकवादियों ने इश्क़ाफ़ अहमद मुगल के घर पर हमला किया था जिसमें उन्हें गोली मार कर अपहरण कर लिया गया था। उस समय परिवार ने उन्हें वापस कभी नहीं देखा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आतंकवादियों ने इश्क़ाफ़ मुगल पर सेना के साथ अनौपचारिक संबंधों का आरोप लगाया था। यह घटना उस दौर की कश्मीर में सामान्य जैसी बनी रही, जहां परिवार डर के साये में जी रहे थे।
दो से ढाई दशकों बाद, इसी परिवार को एक और अप्रत्याशित संहार झेलना पड़ा जब बेटे राशिद अहमद मुगल की मौत सेना के एक ‘मुठभेड़’ में हुई। सेना का दावा था कि राशिद एक आतंकवादी था और दस किलोमीटर दूर जंगल में मारा गया, लेकिन परिवार का आरोप था कि यह एक रची गई घटना थी।
राशिद के बड़े भाई अजाज़ अहमद मुगल ने बताया कि उनके भाई सामान्य जीवन यापन के लिए सुबह घर से निकले थे और अगले दिन उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे कुछ घंटों में व्यक्ति आतंकवादी बन सकता है।
राशिद की मौत के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने एक मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया था, जिसका एक सप्ताह की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन जांच की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
Scroll की टीम ने परिवार और घटना स्थल के ग्रामीणों से बातचीत कर सेना के दावों को चुनौती देते हुए कई सवाल उठाए हैं।
अजाज़ मुगल ने दावा किया कि उनके भाई के शव पर उन्नीस गोलियां लगी थीं, जो परंपरागत मुठभेड़ की कहानी से भिन्न है। इस मामले में गहराई से जांच की आवश्यकता बनी हुई है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
इस दुखद घटना ने कश्मीर के उन परिवारों की पीड़ा को फिर से उजागर किया है, जो लगातार संघर्ष और हिंसा की जद में रहते हैं। ऐसी घटनाएं केवल सामाजिक विसंगतियों को बढ़ावा नहीं देतीं, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा को भी चुनौती देती हैं।