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नोएडा: डील कराने के नाम पर 35 लाख ठगे

फेज-2 स्थित एक कंपनी की यूरोप की कंपनी से डील कराने के नाम पर 35.61 लाख रुपये की धोखाधड़ी का प्रकरण सामने आया है। फेज-2 थाने में कोर्ट के आदेश पर यह केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि जर्मनी के म्यूनिख की एक कंपनी के एमडी ने उनसे यूरोप की कंपनी से संपर्क कराने की बात कर 35 लाख रुपये ले लिए लेकिन बाद में कोई डील नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों पर जांच की जा रही है।

थाना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कोर्ट में प्रार्थनापत्र कंपनी के सीओओ नवीन चंद्र उप्रेती की तरफ से दिया गया। इसमें बताया गया कि 2020 में वह जर्मन कंपनी के संपर्क में आए थे। जहां आरोपी ने उन्हें कुछ पेपर दिखाए थे जिसमें उसने दावा किया था कि वह इंडिया की कंपनियों को यूरोप में क्लाइंट के साथ अच्छा इन्वेस्टमेंट भी दिलवा चुका है। उनके कंपनी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने का काम करती है। उसने बताया कि इसकी यूरोप में अच्छी डिमांड है और वहां की कई नामी कंपनियों के साथ वह उनके बिजनेस को इंटरनेशनल स्तर पर लेकर जा सकता है। इसके बाद उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट करते हुए 6 हजार यूरो (करीब 5.97 लाख) दे दिए। इसके बाद उन्होंने एक और पेमेंट 2500 यूरो की आरोपी की कंपनी को की। पीड़ित के अनुसार करीब 8.50 लाख रुपये देने के बाद आरोपी ने किसी कंपनी से संपर्क नहीं कराया था। 2021 में एक रोबोटिक्स कंपनी से उनकी बात शुरू हुई और उसके साथ बिजनेस डील कराने के नाम भी और रुपये लिए। आरोपी ने अक्टूबर 2021 तक 35 हजार 534 यूरो (35.61 लाख) रुपये ले लिए, लेकिन कोई डील नहीं मिली। बाद में कंपनी के बारे में जानकारी करने पर उन्हें फर्जीवाड़े का पता चला

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}