एसीईओ नागेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बोर्ड से मंजूरी के बाद एजेंसी के चयन की प्रक्रिया को शुरू की जानी थी। इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। जल्दी ही इच्छुक एजेंसियों के ऑफर के लिए ईओआई जारी कर दिया जाएगा। बेहतर एजेंसी से प्राधिकरण बसों का संचालन कराएगा। नए साल में बसों का संचालन शुरू करने का प्रयास है। अभी चार बसें एनटीपीसी की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं जल्दी ही दो और बसें इन हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसे बेड़े में शामिल की जाएंगी। ऐसे में एजेंसी को भी छह बसों के लिए चालक व परिचालक उपलब्ध कराने के लिए सेवाएं देने के लिए कहा जाएगा।
प्राधिकरण और एनटीपीसी के बीच हुई शर्तों के मुताबिक संचालन की जिम्मेदारी प्राधिकरण की होगी। वहीं फ्यूल की आपूर्ति के अलावा बसों का जरूरी रखरखाव एनटीपीसी कराएगा। बसों के संचालन के लिए जरूरी अनुमति या परमिट की व्यवस्था भी प्राधिकरण के द्वारा ही की जानी है। एक बार फ्यूल भरने पर 600 किमी चलेगीं बसें
एनटीपीसी के प्राधिकरण को दिए गए प्रजेंटेशन के मुताबिक यह बस एक बार हाइड्रोजन सेल के फॉर्म में फ्यूल मिलने के बाद 600 किमी चल सकेगी। एयरकंडीशंड बसों में 45 यात्रियों के बैठने की सुविधा रहेगी। संचालन के समय केवल भाप निकलेगी जोकि प्रदूषण रहित उत्सर्जन होगा। प्रदेश का पहला पायल प्रोजेक्ट
यमुना सिटी में हाइड्रोजन फ्यूल से संचालित बसों का यह पहला पायलट प्रोेजेक्ट होगा। प्रयोग अगर सफल रहा तो भविष्य में दिल्ली-एनसीआर के अलावा कई प्रमुख शहर में इन बसों का संचालन शुरू हो सकेगा। एनटीपीसी का प्रयास है कि प्रदूषण से जूझ रहे शहरों में इस तरह की बसों का संचालन पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कराया जाए।

