बाद में ब्लू सफायर मॉल के पास सोनू और उसके साथी को उतारकर दीपिका ने बैग खोला तो पता चला कि ऊपर सिर्फ एक असली नोट रखा गया था, बाकी सभी कागज की गड्डियां थीं। जब वह वापस फ्लैट पहुंचीं तो वहां कोई नहीं मिला। इसी आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कर जांच शुरू की। पुलिस गिरोह की तलाश कर रही थी। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि ठगी के खुलासे के लिए टीमों का गठन किया गया था। लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गुरूवार रात 9:27 बजे सेक्टर-16बी स्थित रुद्रा निर्माणाधीन सोसाइटी के पास कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान वैशाली बिहार के चंचल कुमार (25), सारन बिहार के इंद्रमणि उर्फ राजा (24), रितेश उर्फ अंकित (22), जौनपुर के शुभम तिवारी (28), बस्ती के नवीन सिंह (21) और पटना विहार के गौरव गुप्ता (44) के रूप में हुई है। गिरोह सोशल मीडिया, परिचितों या कॉल के जरिए लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर जाल में फंसाते हैं। वांछित आरोपियों की तलाश की जा रही है। जानकारी में आया है कि गिरोह लोगों को अधिक धन का लालच देकर नोट बदलने के नाम पर ठगी करते है। इस गिरोह में 6-7 लोग शामिल रहते है। सभी का अलग-अलग काम होता है। जिसमें दो व्यक्ति ग्राहक को झांसा देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। बाकी लोग फ्लैट पर पहले से मौजूद रहते हैं। यह लोग ग्राहक से अपना असली नाम छिपाकर मिलते है। आरोपी लोग ऐसे लोगों निशाना बनाते थे। जिनके पास नकदी बड़ी मात्रा में हो। जिनको आरोपी एक का तीन गुना करने का दावा करते है। फिर उनको बताया हुए पते के बाहर से ही साथ में पूर्व से निश्चित फ्लैट पर लाया जाता है। लोगों से अपील की है कि दोगुना, तीन गुना पैसा देने जैसी किसी भी योजना पर विश्वास न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस तरह करते थे ठगी
पूछताछ में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। गिरोह नोट डबल के नाम पर हाई-टेक तरीके से ठगी करता था। गिरोह के दो सदस्य पहले ग्राहक को फंसाते थे। पहले चरण में दो सदस्य ऐसे लोगों को खोजते थे जिनके पास भारी रकम नकद में उपलब्ध हो। इसके बाद दो-तीन दिन की बातचीत में विश्वास जीतकर उन्हें ‘दोगुना पैसा’ मिलने का विश्वास दिलाया जाता था। गिरोह एक फ्लैट किराए पर लेकर उसमें विशेष व्यवस्था करता था। कमरे में एक चौड़ा लकड़ी का तख्त रखा जाता था। तख्त के बीच में एक छेद और उसके पीछे दीवार में दूसरा छेद बनाया जाता था। तख्त के नीचे एक सदस्य छिपकर बैठता था। सामने दो व्यक्ति नोट गिनने और ग्राहक का ध्यान बंटाने का काम करते थे। ग्राहक के सामने नोट गिनने की मशीन चलाई जाती थी। बैग में मूल नोट गिनकर केवल ऊपर की असली गड्डियां रखी जाती थीं। तख्त के नीचे छिपा व्यक्ति असली गड्डियां निकाल लेता था और उनकी जगह समान आकार की कागज की गड्डियां बैग में डाल देता था। अंत में बैग को लॉक कर दो सदस्य ग्राहक के साथ कार में चलते थे और किसी सुनसान स्थान पर उतारकर भाग जाते थे। इस बीच बाकी सदस्य फ्लैट से असली रकम लेकर फरार हो जाते थे।

