जांच के दौरान सुल्तान ने बताया कि उसने एक माह पहले निजी बैंक में करंट अकाउंट दूसरे संदिग्ध के कहने पर खोला था। संदिग्ध ने सुल्तान से ठगी की रकम पर 25 फीसदी कमीशन देने का वादा किया। बाद में उसे एक नया फोन भी दिया गया। सुल्तान ने बताया कि बैंक खाते में आई रकम की जानकारी उसके बेटे ने ईमेल के जरिये आरोपी से शेयर की। बैंक खाते की पड़ताल करने पर पता चला कि अकाउंट में 25 नवंबर और 26 नवंबर के बीच कुल 10,423 ट्रांजैक्शन किए गए, जिसमें 5.24 करोड़ से अधिक की रकम जमा की गई। जांच में पता चला कि बैंक खाते का इस्तेमाल सिर्फ ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने गैंग के बाकी सदस्यों की पहचान करना शुरू किया। विदेश तक फैला नेटवर्क
सुरेश मुख्य साइबर ठगी के सरगना के बीच की एक अहम कड़ी के तौर पर काम करता था। ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर हवाला ऑपरेटर के हवाले कर दिया जाता था। हवाला वाले क्रिप्टो करेंसी खरीदकर उसके विदेश में ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस इनसे पूछताछ कर हवाला ऑपरेटर और विदेश में बैठे अन्य मास्टरमाइंड समेत बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।

